सहारनपुर : चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सहारनपुर जहां सिद्धपीठ शाकम्भरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है वहीं घर-घर कन्या पूजन कर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना की और पारंपरिक तरीके से नवरात्रि व्रत का समापन किया। नवरात्रि शुरू होते ही घर घर माता की चौकी सजाई हुई है। चारों ओर जय माता के नारों के साथ कन्या पूजन किया जा रहा है। हैरत की बात ये है कि जो लोग बेटे की चाहत में पैदा होने से पहले बेटियों को मार देते हैं वे भी कन्याओं को ढूंढ ढूंढ कर पूजन कर रहे हैं।
आपको बता दें कि सुबह से ही मंदिरों और घरों में मां दुर्गा के नारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर 2 से 10 साल की कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके चरण धोए, तिलक लगाया और चुनरी ओढ़ाकर सम्मान किया। कन्या पूजन के दौरान भक्तों ने कन्याओं को हलवा पूरी और काले चने का प्रसाद खिलाया। इसके साथ ही उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। कई जगहों पर सामूहिक कन्या भोज का भी आयोजन देखने को मिला है।
पंडित रोहित विशिष्ठ ने बताया कि कन्या पूजन की परंपरा सदियों पुरानी है और इसका सीधा संबंध माता वैष्णो देवी की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि नौ कन्याओं की पूजा के बिना नवरात्रि व्रत अधूरा माना जाता है। नवरात्रि की सप्तमी से ही कन्या पूजन शुरू हो जाता है, लेकिन अष्टमी और नवमी को इसका विशेष महत्व होता है। इन दिनों कन्याओं को नौ देवियों का रूप मानकर पूजन किया जाता है। बदलते दौर में भी आस्था और परंपरा की जड़ें मजबूत हैं, जो हर साल दुर्गा अष्टमी पर और गहरी होती जा रही हैं।

