देवबंदी उलेमाओं ने शादियों में फिजूलखर्ची पर जताई चिंता, बोले – “निकाह बना दिखावे का मैदान” 

Ulema on Dhirendra Shastri
सहारनपुर : इस्लाम में निकाह के वक्त किये जाने वाले दिखावे पर देवबंदी उलेमाओं ने एतराज जताया है। जमीयत दावतुल मुस्लीमीन के संरक्षक और देवबंदी आलिम मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने शादियों में बढ़ते दिखावे और फिजूलखर्ची को लेकर एक बार फिर सख्त चिंता जताई है। उन्होंने खास तौर पर सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे पाकिस्तानी शादी कल्चर की नकल को मुस्लिम समाज के लिए नुकसानदेह बताया है। लेकिन पाकिस्तानी कल्चर की नक़ल से इस्लाम में निकाह को एक दिखावे, रियाकारी और गैर-ज़रूरी रस्मों का बोझ बना दिया है।
प्रसिद्द मौलाना एवं देवबंदी उलेमा कारी इश्हाक गोरा ने कहा कि इस्लाम में निकाह एक सादा, आसान और बरकत वाला अमल है, लेकिन आज इसे दिखावे, रियाकारी और गैर-ज़रूरी रस्मों का बोझ बना दिया गया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि “भारत के मुसलमान भी सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली चमक-दमक से प्रभावित होकर उसी तरह की शादियां करने लगे हैं, जबकि इन रस्मों का इस्लामी तालीमात से कोई संबंध नहीं है। हम इस्लामी उसूलों से दूर होते जा रहे हैं। शादियों को आसान बनाने के बजाय हमने उन्हें दिखावे का जरिया बना लिया है। पाकिस्तानी शादी कल्चर की अंधी नकल समाज में गलत रिवायतों को बढ़ावा दे रही है, जो कतई काबिले-कुबूल नहीं है।”
गौरतलब है कि इससे पहले भी मौलाना इसहाक गोरा पाकिस्तानी सीरियलों के प्रभाव पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि तलाक और खुला जैसे मामलों में बढ़ोतरी के पीछे इन सीरियलों का असर भी एक वजह हो सकता है, जो सामाजिक ढांचे को कमजोर कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि निकाह को सादगी, हया और दीन के मुताबिक अंजाम दें, ताकि यह रिश्ता रहमत और बरकत का जरिया बने, न कि दिखावे और बोझ का माध्यम। मौलाना के इस बयान के बाद समाज में शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची और बाहरी कल्चर की नकल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
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