दिल्ली : देश में पांच प्रतिशत किसान अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए अपनी खेती की ज़मीन बेच देते हैं, और 20 से 30 प्रतिशत किसान अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने खेत और गहने गिरवी रखते हैं या बहुत ज़्यादा ब्याज दरों पर लोन लेते हैं। हालांकि, जब इन बच्चों को सरकारी नौकरी नहीं मिलती, तो उन्हें प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्हें खेती में ज़्यादा फ़ायदा नहीं दिखता, इसीलिए वे प्राइवेट नौकरी चुनते हैं, जहाँ न सिर्फ़ उनका शोषण…
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नकली खाद-बीज की बिक्री से किसान परेशान, सरकार ने छेड़ा “विकसित कृषि संकल्प अभियान”
दिल्ली : भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 60 से 65 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। भारतीय किसान न केवल राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा का प्रहरी है, बल्कि अर्थव्यवस्था की गति का भी प्रमुख आधार है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि देश का यह अन्नदाता आज नकली और घटिया खाद, बीज और कीटनाशकों के कारण बर्बादी के कगार पर है। यह समस्या अब छिटपुट नहीं रही, बल्कि एक संगठित और गहरी साज़िश बन गई है जिसमें कई स्तरों पर भ्रष्टाचार…
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