हरिद्वार भूमि घोटाले को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ती दिख रही है। इस मामले में जहां प्राथमिक जांच हो चुकी है, वहीं अब आरोपी अफसरों और कर्मचारियों को चार्जशीट सौंपने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट को लेकर अलग-अलग स्तरों पर जरूरी कार्रवाई पूरी की जा रही है और ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही इन सभी को चार्जशीट सौंप दी जाएगी।
भूमि घोटाले मामले में कार्मिक विभाग और शहरी विकास विभाग अपने-अपने स्तर पर आरोप पत्र देने से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। एक ओर कार्मिक विभाग नियुक्ति प्राधिकारी होने के नाते वरिष्ठ अधिकारियों को आरोप पत्र सौंपेगा, वहीं दूसरी ओर शहरी विकास विभाग से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को विभाग स्तर पर ही आरोप पत्र दिया जाएगा।
हरिद्वार भूमि घोटाले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें मुख्य रूप से दो आईएएस अधिकारी और एक पीसीएस अधिकारी शामिल हैं। आईएएस कर्मेंद्र सिंह, वरुण चौधरी और पीसीएस अजयवीर को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें कार्मिक विभाग द्वारा आरोप पत्र सौंपा जाएगा। इस मामले में इन तीनों अधिकारियों को आरोप पत्र सौंपने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से अंतिम मंजूरी ली जा रही है।
उधर, आरोप पत्र सौंपने के बाद इन अधिकारियों को आरोप पत्र के आधार पर दिए गए बिंदुओं के अनुसार जवाब दाखिल करना होगा। शासन को अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद जांच अधिकारी नामित किया जाएगा। चूँकि इस मामले में डीएम स्तर के अधिकारी को आरोपी बनाया गया है, इसलिए जाँच अधिकारी उनसे दो ग्रेड ऊपर यानी प्रमुख सचिव स्तर का हो सकता है। हालाँकि, किसी वरिष्ठ सचिव को भी जाँच की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है।
यह मामला 54 करोड़ की ज़मीन खरीद का है, जिसके लिए न तो शासन से कोई मंज़ूरी ली गई और न ही ज़मीन खरीद से पहले गठित विभिन्न समितियों की नियमानुसार मंज़ूरी ली गई। शायद यही वजह है कि इन अधिकारियों के लिए चार्जशीट में संतोषजनक जवाब देना बेहद मुश्किल होगा। जब इस मामले पर मुख्य सचिव आनंद वर्धन से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि हरिद्वार ज़मीन घोटाले मामले में अधिकारियों को चार्जशीट देने से संबंधित फाइल उच्च स्तर पर विचार के लिए भेज दी गई है और जल्द ही इस पर कोई फ़ैसला लिया जाएगा।

