वाराणसी : अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वसंत महिला महाविद्यालय में जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज को भारत का मूल समाज बताया और उनके ऐतिहासिक योगदान की चर्चा की। उन्होंने समाज में भेदभाव पैदा करने वालों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर जातियों के बीच भेदभाव और संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे रोकना जरूरी है।

लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज हर युग में देश की रक्षा और संस्कृति के संरक्षण के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा है। जब भगवान राम वनवास में थे और माता सीता का अपहरण हुआ था, तब उनके पास अयोध्या या जनकपुर की सेना नहीं थी। उस समय जनजातीय समाज ने उनके साथ मिलकर रावण के विरुद्ध युद्ध लड़ा था। इसी प्रकार, महाराणा प्रताप ने अरावली के जंगलों में विचरण करते हुए जनजातीय समाज के सहयोग से अपनी सेना का पुनर्गठन किया और अकबर से युद्ध किया। छत्रपति शिवाजी ने भी जनजातीय समाज के सहयोग से ही हिंदू साम्राज्य की स्थापना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विरासत और धरोहर को संजोए रखने में जनजातीय समाज की सदैव महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश की वर्तमान स्वतंत्रता को हम प्रायः एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में देखते हैं, लेकिन जनजातीय समाज ने हर युग में सनातन धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। बिरसा मुंडा ने बहुत कम उम्र में ही धरती माता और गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का संदेश दिया, जो आज भी प्रेरणा देता है ।दो-तीन वर्ष पूर्व आगजनी की घटना हुई थी, तब मैंने कहा था कि यह आगजनी किसी समुदाय विशेष द्वारा नहीं की गई होगी। जांच में पता चला कि आगजनी करने वाले ने भगवा गमछा पहना हुआ था, लेकिन उसके मुंह से ‘या अल्लाह’ निकला। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें समाज से बाहर निकालना होगा, तभी राष्ट्रीय एकता मजबूत हो सकती है। जो लोग समाज को तोड़ने का काम करते हैं, वही लोग फ़र्ज़ी अकाउंट बनाकर जातीय संघर्ष को बढ़ावा देते हैं। यह वही वर्ग है जिसने आदिवासियों को भड़काकर भारत के विरुद्ध खड़ा करने की कोशिश की। इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में किसी भी प्रकार का जाति, धर्म या संप्रदाय का भेदभाव नहीं होता। आज कांवड़ यात्रा श्रद्धापूर्वक चल रही है, लेकिन कुछ लोग इसे दंगा कहते हैं। यही वह वर्ग है जो आदिवासियों को भड़काता है। हमें इनसे सावधान रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जौनपुर में नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर जबरन एक ऊँचा ताजिया बनाया गया, जो हाईटेंशन तार के संपर्क में आ गया और तीन लोगों की मौत हो गई, फिर सड़क जाम कर दी गई। इस पर पुलिस ने पूछा कि क्या करें, तो मैंने कहा कि इन्हें लाठियों से मारो और बाहर फेंक दो, क्योंकि ‘ये लात से मारे जाते हैं, बातों से नहीं मानते।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज वेदों की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करता है। हम पेड़ों और नदियों की पूजा करते हैं, लेकिन उन्हें काटने या उन पर कब्ज़ा करने में संकोच नहीं करते, लेकिन जनजातीय समाज ने वेदों की शिक्षाओं को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जिया है। भारत की परंपरा में यह कभी नहीं कहा गया कि केवल मंदिर जाने वाला या शास्त्रों को मानने वाला ही हिंदू है। जो मानता है वह भी हिंदू है और जो नहीं मानता वह भी हिंदू है। चार्वाक और भगवान बुद्ध वेदों को नहीं मानते थे, फिर भी वे हमारे लिए पूजनीय हैं। जनजातीय समाज के साथ यह सवाल क्यों उठाया जाता है?
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनजातीय समाज के मन में विश्वास पैदा किया है। यह हमारा मूल समाज है। जनजातीय गौरव दिवस का उद्देश्य उनसे संवाद करना और कृतज्ञता व्यक्त करना है। सरकार ने कोल जनजाति जैसे समुदायों को योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने भगवान राम की विरासत से जुड़ी कोल जनजाति को संतृप्त करने का प्रयास किया। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनके बीच जाएँ और उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करें।

