आपको बता दें कि लगातार बारिश के कारण यमुना समेत राज्य की नदियाँ उफान पर हैं। हरियाणा के100 से ज्यादा गाँवों प्रभावित हुए हैं और लगभग 5000 एकड़ से ज्यादा फसलें पानी में डूब गई हैं। बैराज पर बढ़ते जल की स्थिति को देखते हुए हथिनीकुंड बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। लगातार पानी छोड़े जाने से अगले 72 घंटों में दिल्ली और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
दरसअल हर साल बरसात के मौसम में हथिनीकुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इस पानी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। एक ओर यह पानी किसानों की सिंचाई के लिए वरदान साबित होता है, तो दूसरी ओर निचले इलाकों के लिए आफत बन जाता है। जलस्तर बढ़ने से फसलें बर्बाद होती हैं, भूमि का कटाव होता है और सड़कें बह जाती हैं। कई बार जान-माल का नुकसान भी होता है।
हथनीकुंड बैराज हरियाणा के यमुनानगर जिले में यमुना नदी पर स्थित है। इसका निर्माण 1999 में पूरा हुआ था और 2000 से यह पूरी क्षमता से कार्यरत है। यह बांध नहीं बल्कि बैराज है, यानी इसका उद्देश्य पानी रोकना नहीं, बल्कि उसे नहरों में मोड़ना है। इसकी अधिकतम निकासी क्षमता लगभग 10 लाख क्यूसेक है। इसमें कुल 18 फ्लड गेट हैं। इसमें मुख्य नहरें पश्चिमी यमुना नहर (WYC) और पूर्वी यमुना नहर (EYC) हैं। जिनकी क्षमता 20,000 घन फीट प्रति सेकंड (CFS) है। यमुना नदी का पानी दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति करता है और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण इस समय यूपी की ज़मीन पर काफ़ी कटाव हो रहा है। अवैध खनन ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। फ़िलहाल तो कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे पानी का बहाव बढ़ता है, उसका असर दिल्ली तक दिखाई देता है। बैराज से छोड़ा गया पानी शुरुआत में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से बहता है, लेकिन दिल्ली पहुँचते-पहुँचते इसकी रफ़्तार कम हो जाती है। हालाँकि, इस बीच रास्ते में आने वाले खेतों और बस्तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

