बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने “आई लव मोहम्मद-महादेव” विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “‘आई लव मोहम्मद’ कहने में कुछ भी गलत नहीं है। ‘आई लव महादेव’ कहने में कुछ भी गलत नहीं होना चाहिए। लेकिन अगर आप ‘सिर और धड़ अलग हैं’ का नारा लगाएँगे तो कानून न तो आपको और न ही हिंदुओं को बख्शेगा।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि होली-राम जुलूस पर पत्थरबाजी ट्रेंड बन गया है। जिसके चलते हिंदू अब माला और भाला अपने साथ रखें। संभल से पदयात्रा शुरू करने की बात कहते हुए हिन्दू विरोधियों का या तो देश निकाला कराएंगे या फिर उनकी घर वापसी।
उनके इस बयान पर मौलाना साजिद राशिद ने कहा कि “धीरेन्द्र शास्त्री हिन्दू हैं हिन्दू राष्ट्र की बात करते हैं माला और भाला की बात करते है। इनके यहां तो चाकुओं की भी बात करते हैं चाकुओं की धार तेज रखें चाकू काटने के काम आयेगा। यहां तक कह दिया जाता है जो आपके घर आए उसे काट दो। यही बयान अगर मैं दे दूं कि मुसलमान तसबी और तलवार साथ में रखें तो मेरे खिलाफ मुकदमा हो जाएगा। मुझे देश द्रोही कह दिया जायेगा। मुझे एक समुदाय को भड़काने वाला कह दिया जायेगा। सवाल यह है कि बाबा बागेश्वर या कोई भी धर्म गुरु उनको इस तरह के अल्फ़ाज़ बोलने की इजाजत क्यों दी जाती है। उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।”
उन्होंने कहा कि “बागेश्वर धाम धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वह ऐसा प्राणी है जो हमेशा नफरत की बात करता है। अब ये कह रहे है कि हम संभल जायेंगे, और संभल जाकर यात्रा निकालेंगे। या तो देश द्रोहियों को देश से निकालेंगे या उनकी घर वापसी करेंगे, देश निकाला करेंगे। हु आर यू कौन है आप देश निकाला करने वाले ? क्या आप सरकार हैं, या आप दशबके चीफ जस्टिस हैं ? आपको किसने अथॉरिटी दे दी देश निकाला देने की ? इस तरह की बाते करना देश में नफरत फैलाना है। संभल में ही क्यों यात्रा करेंगे आप मेरे यहां सहारनपुर आ जाइए। या दिल्ली में यात्रा कीजिए। ये बिना वजह की बाते देश में नफरत फैलाने वाली हैं मैं इनको कण्डम करता हूं।
वहीं मौलाना कारी इशहॉक गोरा ने कहा कि “धीरेंद्र शास्त्री एक धर्म गुरु के चोले में हैं वो किसको दीदी बोल रहे हैं और किसको दादा बोल रहे हैं उनका रिश्ता क्या है ये तो वही बेहतर जानते होंगे। मुझे लगता है कि वहां उनको इजाजत नहीं मिली है तो असल वजह वहां का प्रशासन बता सकता है या वे खुद बता सकते हैं। जहां मुझे मुझे मालूम है धीरेन्द्र शास्त्री एक धर्मगुरु के चोले में है लेकिन उनकी बातें कहीं ना कहीं सियासी हैं। ऐसा लगता है जैसे वो किसी सियासी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं। धर्मगुरु की पहचान ये नहीं होती के वो सियासत में आकर इस तरह की बाते करें। धर्मगुरु सिर्फ धर्म की बात करता है।”

