बात जब हड्डियों की मजबूती और जोड़ो की लचक बनाये रखने की आती है तो आयुर्वेद में एक नाम बार बार आता है महा योगराज गुग्गल- डॉ अनिल जगन्नाथ

बात जब हड्डियों की मजबूती और जोड़ो की लचक बनाये रखने की आती है तो आयुर्वेद में एक नाम बार बार आता है महा योगराज गुग्गल । यह केवल एक ओषधि नहीं  बल्कि आयुर्वेद  का शक्तिशाली पारंपररिक योग है जो शरीर में जमे हुए दोषो को बहार निकलता है । और वात  के रोगो को जड़ से मिटाता है योगराज गुग्गुल (Commiphora mukul) पर आधारित यह योग लगभग 28 से अधिक औषधियों का संयोजन है, जो “वातरोगों के सर्वोत्तम उपचार” के रूप में प्रसिद्ध है।

संघटन (Ingredients) गुग्गुल (Commiphora mukul) — मुख्य घटक

  • त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला)
  • त्रिकटु (सौंठ, मरीच, पिप्पली)
  • चित्रक (Plumbago zeylanica)
  • हींग (Ferula asafoetida)
  • अजवाइन, जीरा, धनिया, सौंफ
  • देवदारू, एरण्ड मू्ल, रसन
  • रास्नापंचक, पिप्पल्यमूल, सूर्यक, रत्ना, शुण्ठी
  • शुद्ध घी, दालचीनी, तेजपत्ता, इलायची
  •  यह योग वात और कफ दोष को संतुलित करने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से गुणधर्म

  • रस: कटु, तिक्त
  • गुण: लघु, स्निग्ध
  • वीर्य: उष्ण
  • विपाक: कटु
  • दोष प्रभाव: वात-कफ शामक

 मुख्य फायदे (Benefits)

  • जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस में लाभकारी: वातनाशक गुणों से सूजन, जकड़न, stiffness में राहत।
  • मांसपेशियों की कमजोरी में उपयोगी: वातज दुर्बलता और स्नायविक विकारों में सहायक।
  • फिजियोथेरेपी जैसे प्रभाव: सायटिका, स्लिप डिस्क और स्पॉन्डिलाइटिस में राहत।
  • पाचन शक्ति में वृद्धि: अग्नि को तीव्र करता है और विषाक्त द्रव्यों को बाहर निकालता है।
  • गठिया और कोलेस्ट्रॉल में कमी: रक्त से जमा हुए टॉक्सिन को बाहर निकालने में मददगार।
  • शरीर में दर्द और थकान दूर करता है: वात संतुलन से ऊर्जा बढ़ाता है।

 सेवन विधि (Dosage & Use)

  • सामान्यतः 1–2 गोलियाँ, दिन में दो बार, गुनगुने पानी या दूध के साथ।
  • चिकित्सक की सलाह से ही सेवन करें।
  • वात रोगों में दशमूल क्वाथ के साथ भी लिया जा सकता है।

सावधानियाँ (Precautions)

  • गर्भवती महिलाएँ और छोटे बच्चे बिना चिकित्सक की सलाह के सेवन न करें।
  • अत्यधिक मात्रा में लेने से पाचन विकार हो सकता है।
  • पित्त प्रकृति वाले व्यक्तियों को सावधानी से प्रयोग करना चाहिए।

 विज्ञान और योगराज गुग्गुल

आधुनिक रिसर्च में पाया गया है कि योगराज गुग्गुल में Anti-inflammatory, Antioxidant, और Analgesic गुण पाए जाते हैं।
यह गुग्गुलस्टेरोन (Guggulsterone) नामक सक्रिय तत्व के कारण शरीर में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।

घर में प्रयोग की विधि:

  • वातजन्य दर्द में एरण्ड तेल या दशमूल क्वाथ के साथ लिया जाए तो असर दोगुना।
  • सायटिका या स्पॉन्डिलाइटिस में 2 गोलियाँ सुबह-शाम लेने से लाभ।
  • घुटनों के दर्द में तेल से हल्की मालिश और योगराज गुग्गुल का सेवन – उत्तम परिणाम।

 Conclusion (निष्कर्ष)

योगराज गुग्गुल केवल एक औषधि नहीं बल्कि एक जीवनशैली सुधारक संयोजन है। यह शरीर को भीतर से संतुलित करता है, वात दोष को शांत करता है और हड्डियों, जोड़ों एवं नसों को मज़बूती देता है। नियमित प्रयोग से यह उम्रभर हड्डियों का रखवाला और शरीर का सilent healer बन सकता है। योगराज गुग्गुल को “Joint Rejuvenator” कहा जाता है — यह हड्डियों को भीतर से नया जीवन देता है। आधुनिक शोध में पाया गया है कि इसमें पाए जाने वाले “Guggulsterones” कोलेस्ट्रॉल घटाने में भी मदद करते हैं। योगराज गुग्गुल आर्थराइटिस और डिटॉक्सिफिकेशन दोनों में समान रूप से प्रभावी है। इसे “स्नायु पोषक योग” कहा जाता है क्योंकि यह नसों की क्षति (nerve damage) को ठीक करने में सहायक है।  पुराने जमाने में सैनिक युद्ध के बाद जोड़ों और स्नायविक थकान दूर करने के लिए इसी योग का प्रयोग करते थे। यह मानसिक शांति भी बढ़ाता है क्योंकि इसमें त्रिफला और त्रिकटु के “सत्व शोधन” गुण हैं। आधुनिक विज्ञान इसे “Natural Painkiller + Anti-aging tonic” मानता है।

नोट  -किसी भी आयुर्वेदिक दवाई को लेने से पहले पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य  से सलाह अवशय ले

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