सहारनपुर : यूपी के शामली में बुर्का न पहनने से नाराज सनकी पति ने पत्नी और दो बेटियों की न सिर्फ गोली मारकर हत्या कर दी बल्कि सेफ्टी टेंक में शवों को ठिकाने लगा दिया। घटना के बाद पुलिस ने हत्या आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में हत्या आरोपी ने पुलिस में हत्या की वज़ह बताई तो बताई तो सब हैरान रह गए। बुर्का और हिजाब न पहनने पर शक्स ने पत्नी और बेटियों की हत्या को मौत के घाट उतार दिया। जिसको लेकर इस्लामिक जगत में शोक की लहर है। देवबंदी उलेमाओं ने इस घटना की जहां निंदा की है बल्कि इस्लाम में बुर्का पहनना जायज करार दिया है। हालांकि बुर्का और हिजाब पहनने के लिए किसी को मजबूर करना गलत है। कारी इश्हाक गौरा ने कहा कि हिजाब ना पहनने पर किसी की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। इस्लाम इसकी इजाजत हरगिज नहीं देता। ऐसे शख्स को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

आपको बता दें कि जनपद शामली के थाना कांधला इलाके के गांव गढीदौलत निवासी फारुख ने बुर्का और हिजाब ना पहनने पर 32 वर्षीय पत्नी ताहिरा और दो बेटियों 12 साल की आफरीन व 5 साल छोटी सारीन की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद फारुख ने शवों को शौचालय के सेफ्टी टेंक में दफना दिया। पुलिस और अन्य परिजनों को गुमराह करने के लिए फारुख ने पत्नी और दोनों बेटियों के लापता होने का ड्रामा किया। लेकिन पुलिस ने सख्ताई से पूछताछ की तो तिहरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। पुलिस पूछताछ में हत्यारोपी फारुख ने बताया कि उसकी पत्नी ताहिरा बुर्का और हिजाब पहनने से मना करती थी। जिसके चलते गुस्से में आकर उसने यह कदम उठाना पड़ा।
शामली की इस घटना पर देवबंदी उलेमाओं ने मजहमत करते हुए कहा कि शामली में बुर्का ना नहीं पहनने पर पत्नी और बच्चियों की हत्या की घटना बहुत निंदनीय है। मौलाना कारी इश्हाक गोरा ने कहा कि इस्लाम में किसी का भी क़त्ल करना बहुत बड़ा पाप यानी गुनाह है। बेगुनाह का क़त्ल इंसानियत का क़त्ल है। इस्लाम इस बात की कतई इजाजत नहीं देता कि आप किसी के साथ कोई जोर जबदस्ती करें। यह बात सच है मजहब इस्लाम महिलाओं को कीमती और अहम् मानता है। जैसे कीमती वस्तुओं को छिपा कर रखा जाता है उसी प्रकार इस्लाम कहता है कि महिलाएं पर्दा करें, बुर्का और हिजाब पहने। लेकिन यह उन्हें अपनी मर्जी से करने को कहा गया है किसी से जबदस्ती पहनने को नहीं कहा जाता। मजहब ए इस्लाम किसी से जबरदस्ती करने की इजाजत नहीं देता।
कारी इश्हाक गोरा ने कहा कि अगर फारुख ने बुर्का ना पहनने पर पत्नी और बेटियों की हत्या की है तो यह बहुत गलत है। उसको इस्लाम की सही जानकारी नहीं है। मजहब ए इस्लाम से कोई तालुक नहीं होता। अगर किसी को इस्लाम की जानकारी नहीं है तो उन्हें अपने धर्म गुरों से इस बाबत जानकारी लेनी चाहिए। अधूरी जानकारी ज्यादा घातक होती है। वहीं मुफ़्ती असद कासमी ने कहा कि शामली में बुर्का ना पहनने पर अपनी पत्नी और बच्चो की हत्या की है उसकी जितनी मजहमत की जाए कम है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे दरिंदे को जिसने अपनी पत्नी और दो बेटियों की हत्या की है उसे गिरफ्तार करके फांसी की सजा दे देनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी गलती ना कर सके। ऐसे लोग इस्लाम, मुसलमानों, कुरआन और हदीस को बदनाम करने का काम करते हैं। मुफ़्ती असद कासमी ने कहा कि मजहब ए इस्लाम जानवर की हत्या करने को भी गुनाह समझता है। ऐसे में इस्लाम इंसान की हत्या करने को कैसे जायज समझ लेगा। मजहब ए इस्लाम में उसने बहुत बड़ा अपराध किया है उसकी सजा उसको जरूर मिलनी चाहिए।
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