
जैसे ही उनका काफिला दारुल उलूम पहुंचा तो उन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी। आमिर खान मुत्तक़ी गाडी से उतरे भी नहीं थे कि छात्रों की भीड़ बेकाबू हो गई। जिसके चलते उन्हें सम्मान रूप दिया जाने वाला गार्ड ऑफ़ ऑनर भी नहीं हो पाया। भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए दारुल उलूम प्रबंधन ने अफगानी मंत्री आमिर खान मुत्तक़ी द्वारा छात्रों को संबोधन करने वाला कार्यक्रम रद्द करना पड़ा और 5 बजे की बजाए ढाई बजे ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

दारुल उलूम के मेहमानखाने में लंच के बाद बैठक आयोजित की गई। बैठक में अफ़ग़ान छात्रों के लिए शैक्षिक वीज़ा सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।अफ़ग़ान विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी को अपनी भारत यात्रा के दौरान दारुल उलूम देवबंद में हदीस पढ़ाने की अनुमति दी गई। दारुल उलूम प्रबंधन ने उन्हें ‘हदीस-ए-सनद’ (हदीस के लिए एक उपाधि) से नवाजा है, जिससे अब वे अपने नाम के आगे ‘मौलाना’ और ‘क़समी’ लगा सकेंगे।
जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि आमिर खान मुत्तक़ी ने संस्थान के प्रमुख मौलाना मुफ़्ती अबुल क़ासिम नोमानी से हदीस का पाठ पढ़ा और पढ़ाने की अनुमति प्राप्त की। अनुमति मिलने पर उन्हें हदीस-ए-सनद (हदीस के लिए एक उपाधि) प्रदान की गई। पाठ पढ़ने के बाद विदेश मंत्री के चेहरे पर खुशी साफ़ झलक रही थी। दारुल उलूम के विशाल गोलाकार पुस्तकालय में आयोजित इस कार्यक्रम में 15 प्रमुख विद्वान उपस्थित थे। संस्था के प्रमुख मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी की देखरेख में कार्यक्रम की तैयारी की गई। स्वागत के दौरान छात्रों ने भी उत्साह दिखाया।
आपको बता दें कि अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तक़ी का काफ़िला सुबह 8:30 बजे दिल्ली से रवाना हुआ और दोपहर 12 बजे फतवों की नगरी दारुल उलूम देवबंद पहुँचा। सुरक्षा एजेंसियों ने उनके दौरे को लेकर व्यापक इंतजाम किये हुए थे। पूरा इलाका पुलिस की निगरानी में था। छात्र और स्थानीय लोग उनके स्वागत के लिए सड़कों पर खड़े थे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों को पारंपरिक नियमों के अनुसार, पर्दा न करने और एक अलग जगह पर बैठने के लिए कहा गया। दारुल उलूम प्रशासन ने इसे अपनी सदियों पुरानी परंपरा बताया।

मिडिया प्रभारी अशरफ उस्मानी ने बताया कि हदीस प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद मुत्तक़ी का नाम आधिकारिक तौर पर बदल दिया गया। अब उन्हें “मौलाना अमीर खान मुत्तक़ी कासमी” के नाम से जाना जाएगा। पाठ के बाद उनके चेहरे पर खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी। संस्था के विद्वानों ने उनका सम्मान किया और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुत्तक़ी ने दारुल उलूम के अतिथि गृह में विद्वानों के साथ भोजन किया और छात्रों से बातचीत की। संस्थान ने उन्हें अपने विशेष अतिथि के रूप में सम्मानित किया। तय कार्यक्रम के अनुसार मुत्तक़ी को 5 बजे तक देवबंद में रुकना था लेकिन भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से मुत्तक़ी का छात्रों को संबोधन रद्द कर दिया गया। परिणामस्वरूप उन्हें निर्धारित समय से लगभग ढाई घंटा पहले दिल्ली लौटना पड़ा। दोपहर ढ़ाई बजे ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। जहाँ वे अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा का अगला चरण पूरा करेंगे।
दरअसल अफगानिस्तान के विदेश मंत्री को देखने के लिए शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ तक के मदरसों से छात्रों को बुलाया गया। उनकी एक झलक पाने को मदरसों के छात्रों ने नियम, कानून और अनुशासन का कोई पालन नहीं किया। दारुल उलूम में मुत्तक़ी की गाडी पहुँचते ही छात्रों ने उनकी गाडी घेराव कर लिया। जिससे वे गाड़ी से निचे भी नहीं उतर पाए। स्थानीय पुलिस के जवान गार्ड ऑफ़ ऑनर देने के लिए इन्तजार करते रहे लेकिन भीड़ अचनाक से बेकाबू हो गई। बेरिकेटिंग तोड़ते हुए दारुल उलूम के छात्रों ने मुत्तक़ी की गाडी का घेराव कर लिया। जिसके चलते उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर भी नहीं दे पाए। उधर बेकाबू भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठियां फटकारनी पड़ी और अफ़ग़ान विदेश मंत्री का निर्धारित संबोधन रद्द कर दिया गया।

