सैनी सरकार फेस ऐप लॉन्च करने की तैयारी में, पेंशन भोगियों को मिलेगी बड़ी राहत, नहीं काटने होंगे सरकारी विभाग के चक्कर

CM Nayab Saini

पंचकूला : सैनी सरकार फेस ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसका लाभ प्रदेश के 36 लाख पेंशन भोगियों को मिलेगा। इससे न केवल पेंशन भोगियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश सरकार के प्रशासनिक विभागों को भी रिकॉर्ड अपडेट करने में सुविधा होगी। इस ऐप के जरिए से प्रदेश के पेंशन भोगी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ लेने वाले लोग अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकेंगे। इस फेस ऐप का परीक्षण अंतिम चरण में पहुंच गया है।

 प्रदेश सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत अगस्त 2025 में कर सकती है। सबसे पहले प्रदेश के दो जिले पंचकूला और अंबाला में इस फेस ऐप को लॉन्च कर इसका ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल के बाद इसे पूरे प्रदेश भर में इसे लागू कर दिया जाएगा। इस फेस ऐप के लॉन्च होने से सभी सरकारी विभाग बहुत कम समय में और आसानी से रिकॉर्ड को अपडेट रख सकेंगे, क्योंकि प्रदेश के अधिकांश विभागों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। नतीजतन साल 2025 में सभी विभागीय डेटा को अपडेट किए जाने का प्रयास किया जा रहा है । ऐसा होने पर प्रदेश में विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक लाभ लेने वालों का पूरा रिकॉर्ड एक क्लिक में सामने होगा ।

प्रदेश में बीते समय कई ऐसे मामले भी सामने आए, जब किसी व्यक्ति के मृत होने का दावा कर अन्य लोग उसके नाम से प्रदेश सरकार की योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक लाभ ले रहे हैं। हालांकि अब इस फेस ऐप के लॉन्च होने के बाद से ऐसी चूक की गुंजाइश न के बराबर रहने की उम्मीद है, क्योंकि विभागों में दर्ज मृत और जीवित लोगों का रिकॉर्ड अपडेट रहेगा। मृतकों को लाभार्थियों की सूची से बाहर किया जा सकेगा ।

प्रदेश में बुजुर्ग पेंशन भोगियों को सरकार से सामाजिक-आर्थिक लाभ लेने के लिए अपने लाइफ सर्टिफिकेट को तहसील और अन्य ऑफिस में जमा कराने के लिए परेशान होना पड़ता है। हालांकि फेस ऐप की लॉन्चिंग के बाद लाभार्थी साल में दो बार घर बैठे ही मोबाइल फोन से लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवा सकेंगे। प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार 21.96 लाख वृद्ध लोग वृद्धावस्था सम्मान भत्ता लेते हैं। इनके अलावा 8.88 लाख विधवा और 2.09 लाख दिव्यांग जन को पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। ऐसे ही योजनाओं में बौनेपन से ग्रस्त लोगों, ट्रांसजेंडर, निराश्रित बच्चे और नोटिफाई दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को भी सहायता प्रदान की जाती है।

 इस फेस ऐप के जरिए लाभार्थी को साल में दो बार लॉग इन कर सत्यापन कराना होगा। स्मार्टफोन नहीं होने की सूरत में लोगों के पास कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और स्थानीय सेवा कार्यालय जाकर सुविधा हासिल करने का विकल्प भी रहेगा। लोग स्थानीय सीएससी या ब्लॉक-स्तरीय कार्यालयों में जाकर प्रमाणीकरण के लिए ऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीकी बाधाओं के कारण कोई लाभ से वंचित न रहे। स्थानीय सेवा कार्यालयों में लोगों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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