उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही करना होता तो वे अपनी पार्टी नहीं बनाते, बल्कि बसपा के साथ आते और इस मिशन को आगे बढ़ाते। बसपा सुप्रीमो ने यह भी कहा कि अगर जातिवादी पार्टियों की मदद से ऐसे संगठन या पार्टियों के लोग सांसद-विधायक भी बन जाते हैं, तो वे अपने समाज के लिए कुछ नहीं करेंगे। बसपा सुप्रीमो ने एक बार फिर ईवीएम के बजाय सभी तरह के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं तो बसपा के अच्छे दिन जरूर आएंगे। इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नेताओं की आपसी टिप्पणियों को लेकर भी चिंता जताई। इससे समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता। मायावती ने अपने दलित वोट बैंक को यह भी समझाने की कोशिश की कि वे भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में न आएं। ये वो पार्टियां हैं जो हमारे ही समाज के लोगों को बांटकर बसपा को खत्म करने में लगी हैं। हमें इनसे हमेशा सावधान रहना होगा।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जब से बसपा के सांसद और विधायक चुने गए हैं और पार्टी कई बार उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई है, तब से केंद्र और राज्य सरकार की सत्तारूढ़ और अंबेडकर विरोधी जातिवादी पार्टियां साम, दाम, दंड, भेद जैसे कई हथकंडे अपनाकर बसपा को कमजोर करने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सत्ता और विपक्ष में बैठी जातिवादी पार्टियों ने पर्दे के पीछे से दलित और अन्य उपेक्षित वर्गों के कुछ अवसरवादी और स्वार्थी लोगों को मैनेज कर लिया है और उनके माध्यम से कई संगठन और पार्टियाँ बना ली हैं।
मायावती ने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालांकि विपक्षी दल भी ईवीएम में धांधली की बात बहुत कह रहे हैं, लेकिन अब हमारी पार्टी और अधिकांश विपक्षी दल भी चाहते हैं कि देश में होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव पहले की तरह बैलेट पेपर से ही कराए जाएं। जो कि वर्तमान सरकार में संभव नहीं हो सकता, लेकिन उम्मीद है कि सत्ता परिवर्तन के बाद यह सब संभव हो जाएगा, इसलिए ऐसी संभावनाओं के चलते हमारी पार्टी के लोगों को बिल्कुल भी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके लिए अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक हालात में ईवीएम प्रणाली कभी भी बदल सकती है, तब देश में हर चुनाव बैलेट पेपर से ही होगा। ऐसा होने पर बसपा के अच्छे दिन फिर से लौट आएंगे। पूर्ण बहुमत के आधार पर सत्ता में आ सके, खासकर उत्तर प्रदेश में, जो सभी लोगों के हित में बहुत जरूरी है, ताकि ऐसे सभी अवसरवादी व स्वार्थी संगठनों व दलों के नेता जो कांग्रेस, भाजपा व सपा के समर्थन से दलितों व अन्य उपेक्षित वर्गों की एकता को कमजोर करने का काम कर रहे हैं तथा उनकी एकमात्र हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी बसपा, भले ही अपने निजी स्वार्थ में सांसद, विधायक व मंत्री बन जाएं, इन लोगों को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है।
मायावती ने कहा कि देश में कोरोना का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। इसको रोकने के लिए सभी राज्य सरकारों को विशेष ध्यान देना चाहिए। देश में लगातार बढ़ती गरीबी और महंगाई ने लोगों को तोड़कर रख दिया है। इसके साथ ही देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और तूफान के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को इन सभी मामलों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। सरकारी कार्यक्रमों के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता की कमी के कारण आए दिन भगदड़ में होने वाली मौतें भी चिंता का विषय है। सरकारों को इस ओर भी जरूर ध्यान देना चाहिए।

