अब छिनेगा पीएम आवास योजना में बनाया गया गया आशियाना, सिंचाई विभाग ने PMAY योजना में बने मकानों पर भी लगाए रेड क्रॉस के निशान, जांच की बात कर रहे अधिकारी 

Major action by the Irrigation Department

सहारनपुर : एक ओर जहां प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी गरीब और असहाय परिवारों के लिए पक्का घर बनवा रहे हैं वहीं सहारनपुर के सिंचाई विभाग ने प्रधान मंत्री की महत्वकांक्षी योजना प्रधान मंत्री आवास योजना पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग ने कस्बा बेहट की इंदिरा कॉलोनी और मोहल्ला सड़क पार में सैकड़ों घरों को न केवल अवैध घोषित कर दिया है, बल्कि उन्हें ढहाने की तैयारी भी कर ली है। इसके लिए बाकायदा 450 से ज्यादा घरों पर रेड क्रॉस, येलो क्रॉस और ग्रीन क्रॉस के निशान लगाए हैं। सिंचाई विभाग ने उन मकानों पर भी रेड क्रॉस के निशान लगाए हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाये गए हैं। ख़ास बता तो ये है कि इन मकानों को सिंचाई विभाग ने अवैध घोषित किया है जबकि PMAY के लाभार्थियों को योजना का लाभ पूरी छानबीन और सभी दस्तावेजों को जमा करने के बाद मिला है।

Saharanpur News PMAY

कॉलोनी वासियों ने बताया कि ये लोग कई दशकों से यहां रह रहे हैं। जमींदारा ख़त्म होने के बाद यह जमीन इन लोगों को आवंटित कर दी गई थी। जिसके बाद ये लोग झोपड़ी और कच्चे मकान बना कर रहे थे। लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी ने सबके सर पर अपनी छत का सपना साकार करने की घोषणा की तो इन्होने प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। उस वक्त योजना में मांगे गए सभी दस्तावेज जमा किये गए और तहसील स्तर से इसकी जाँच की गई। जाँच में सही पाए जाने के बाद ही उन्हें प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत तीन किस्तों में 2.5 लाख रूपये का अनुदान मकान बनाने के लिए दिया गया। इसके लिए मकान बनाते वक्त कई बार ऑनलाइन फोटो ग्राफ़ी भी की गई। इंदिरा कॉलोनी और सड़क पार मोहल्ले में 100 से ज्यादा ऐसे मकान PMAY योजना के तहत बने हैं।

सोमवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों, पुलिस और प्रशासनिक टीमें इंदिरा कॉलोनी और सड़क पार मोह्हले में पहुंची। जहां माइक से अनाउंसमेंट करते हुए कॉलोनी खाली करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था। कुछ लोगों ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई रोकने की माँग की लेकिन प्रशासन ने मकानों पर निशान लगाने शुरू कर दिए। अधिकारीयों के निर्देश पर जहां चिह्नित मकानों पर लाल क्रॉस के निशान लगाए गए तो कुछ मकानों पर पीले और हरे निशान भी लगाए गए।

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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रवीण जोशिया, डीआरओ विशेष सैनी, सहायक अभियंता पूजा सैनी, जेई अशोक कुमार, क्षेत्राधिकारी तौफीक और पूरा राजस्व अमला पुलिस बल के साथ लाउडस्पीकर से घोषणा की कि निवासी तीन दिन के भीतर इंदिरा कॉलोनी सड़क पार के कुछ घरों को खाली कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तीन दिन के भीतर मकान खाली नहीं किये तो विभाग ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा। इतना ही नही मकान तोड़ने का खर्च भी इन गरीबोब पर ही थोपने की धमकी दी गई।

जानकारी के अनुसार कॉलोनी के 70 लोगों ने अधिकारियों को अदालत के स्टे आर्डर की एक प्रति दिखाई और कार्यवाही रोकने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने उनके घरों पर हरे और पीले रंग निशान लगाए। सिंचाई विभाग का दावा है कि खसरा संख्या 729 में स्थित यह ज़मीन सिंचाई विभाग की थीजिस पर कब्जा कर कॉलोनी वासियों ने मकान बना लिए हैं। वहीं कॉलोनी वासियों का कहना ही कि जमींदारा ख़त्म होने पर यह जमीन इनके बड़े पूर्वजों को आवंटित कर दी गई थी। इस जमीन में ये लोग 50-60 साल से रहते आ रहे हैं। इसके लिए नगर पंचायत बेहट को बाकायदा गृहकर और जलकर जमा करते आ रहे हैं। अगर यह जमीन सिंचाई विभाग की थी तो अब से पहले क्यों नहीं आया। सिंचाई विभाग ने इन्हे न तो कोई नोटिस जारी किया और ना ही कभी इसका जिक्र नगर पंचायत ने किया जहां 50 सालों से हाउस टैक्स जमा करते आ रहे हैं।

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हैरत की बात तो ये है कि नगर पंचायत में शामिल सड़कपार मोहल्ले के भी दर्जनों मकानों पर रेड क्रॉस लगाकर चिन्हित किया गया है। जबकि इंदिरा कॉलोनी वासी कई दशकों से नगर पंचायत में शामिल होने को तरस रहे हैं। 380 से ज्यादा मकानों को चिन्हित कर बुलडोजर कार्यवाई की चेतावनी दी गई है। जिनमे से 100 से ज्यादा मकान ऐसे हैं जो कागजो की जांच पड़ताल के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाये गए हैं। इन परिवार को अब अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। ऐसे में सवाल यह भी उठाना लाज़मी है कि जब सरकारी जांच पड़ताल के बाद इन गरीब परिवारों को प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए ढाई लाख रूपये का अनुदान दिया गया तो यह मकान अब अवैध कैसे हो सकते हैं? कई लोगों ने तो नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मकानों को ध्वस्तीकरण के नाम पर बड़ा स्केम करने की साजिश है। इंदिरा कॉलोनी के परिवारों से 5 हजार के हिसाब से 12 रूपये पहले ही इक्क्ठे किये जा चुके हैं।

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उप राजस्व अधिकारी विशेष सैनी ने बताया कि सिंचाई विभाग की ज़मीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा करने वालों के ख़िलाफ़ पहले भी नोटिस जारी किए गए थे और मुकदमे दर्ज किए गए थे। जिसके बाद 70 लोगों ने कोर्ट जाकर स्टे ले लिया। इन 70 घरों को छोड़कर बाकी घरों की पहचान की जा रही है और तीन दिन के अंदर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। संबंधित विभागों को बिजली कनेक्शन काटने और पेयजल आपूर्ति बंद करने के लिए पत्र भी भेज दिए गए हैं। तीन दिन बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होगी।

अधीक्षण अभियंता प्रवीन जोशिया ने बताया कि कस्बा बेहट की इंदिरा कॉलोनी और सड़क पार मोहल्ला सिंचाई विभाग की जमीन पर है। जहां लोगों ने अवैध रूप से सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जा कर मकान बनाये हुए हैं। कई बार नोटिस के बाद भी लोग घरों को बनाने में लगे हुए हैं। 415 घरों को चिन्हित कर निशान लगाए गए हैं। सभी मकानों को खाली करा कर कब्जा मुक्त कराया जाएगा हालांकि ध्वस्तीकरण की कार्यवाई को अभी रोका गया है। जब अधीक्षण अभियन्ता से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए घरों पर लगाए निशान पर सवाल किया तो अधीक्षण अभियन्ता बगले झांकने लगे। इस पर उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग की टीम के साथ इसकी भी जांच करायी जायेगी। य़ह निशान कैसे और क्यों लगाए गए? इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में बनाए गए मकान किस श्रेणी में आते हैं इनकी भी जांच करायी जायेगी। लेकिन यहां अधीक्षण अभियंता य़ह भूल गए कि तमाम जांचों के बाद ही प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी को मकान के लिए ढाई लाख रुपये अनुदान के रूप मे मिलता है।

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