दिल्ली : संसद का विंटर सेशन शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी का मीडिया को दिया गया बयान गंभीर चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि संसद को “हार की निराशा का मैदान” नहीं बनाना चाहिए और “ड्रामा नहीं, काम करना चाहिए।” लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या विपक्ष का सरकार से सवाल करना और उसकी आलोचना करना सच में ड्रामा है? क्या विरोध का प्रोसेस संसद का हिस्सा नहीं होना चाहिए, जो डेमोक्रेसी की जड़ है? प्रधानमंत्री की भाषा, जो सीधे तौर पर संसद में विपक्ष की एक्टिविटी…
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