“हर घर नल से जल” योजना की खुली पोल, पांच में से बन रही पानी की टंकी पड़ी अधूरी, धूल फांक रहे नलकूप और सोलर पैनल, स्वच्छ जल को तरस रहे ग्रामीण 

JAL JEEVAN MISSION

सहारनपुर : एक ओर जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार “हर घर जल से नल” पहुँचाने के दावे कर रही है लेकिन हकीकत कुछ और ही ब्यान करती है। नौकरशाह और ठेकेदारों की मनमानी के चलते “जल शक्ति मिशन” न सिर्फ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है बल्कि सरकार के दावों को पलीता लगाया जा रहा है। धरातल पर जाकर देंखे तो करोड़ों खर्च के बाद भी ग्रामीण शुध्द पानी पीने को तरस रहे हैं। यह एक दो गाँव में नहीं बल्कि सैकड़ों गाँव का दर्द है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ “हर घर जल से नल” को लेकर विधायक डॉ. बृजभूषण राजपूत की हुई तू-तू , मैं मैं इस बात की बानगी है। सरकार के लाख दावों के बाद भी “हर घर नल से जल” योजना का हाल चौकाने वाला है। ऐसे सैंकड़ों गाँव है जहां सालों से सरकारी नलकूप के साथ पानी स्पलाई की पाइप लाइन बिछी हुई है लेकिन ग्रामीणों के घरो तक एक बून्द पानी नहीं पहुंचा। सरकारी नलकूप को चलाने के लिए सोलर प्लांट लगाया हुआ लेकिन कनेक्शन ना होने से सोलर लाखों के सोलर पैनल और नलकूप धूल फाँक रहे हैं। पाइप लाइन से निकले कनेक्शन यानि पाइप बिना टोंटी के ही पानी की बाट झोह रहे हैं। हर घर के बाहर लोहे के पाइप निकाले हुए हैं लेकिन उन तक कभी पानी नहीं आया।

हमारी टीम ने सबसे पहले स्मार्ट सिटी सहारनपुर से महज 6 किलोमीटर दूर कांकरखुई गाँव पहुंच कर “हर घर नल से जल” योजना का हाल जानने की कोशिश की तो ग्रामीणों का दर्द छलक उठा। कांकरकुई गाँव में करीब पांच साल पहले पानी की टंकी, नलकूप और पाइप लाइन बिछाने के लिए 2 करोड़ रुपए प्रस्तावित हुए थे। टेंडर हुआ तो ठेकेदार ने नलकूप लगाने के साथ पुरे गाँव में पाइप लाइन बिछाकर घर घर नल के कनेक्शन कर दिए। जिसके बाद गाँव वालों ने जश्न मनाया और सरकार का आभार जताया क्योंकि उन्हें स्वच्छ जल मिलने की उम्मीद जो जगी थी। गाँव में सरकारी नल का पानी सप्लाई नहीं होने से अब ग्रामीण अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। लेकिन नलकूप के पास चार साल से पानी टंकी का काम शुरू हुआ तो ग्रामीणों को आशा की किरण नजर आई। लेकिन ठेकेदारों की लेट लतीफी और कमीशनखोरी ने फिर से स्वच्छ जल मिलने के अरमानों पर पानी फेर दिया। जिस टंकी को बनाने की समय अवधि एक साल दी गई थी वह चार साल बाद भी अधूरी पड़ी है। इस टंकी को बनाने के लिए पांच ठेकेदार बदले गए लेकिन परिणाम डाक के तीन पात ही नजर आये।
ग्रामीण टेकराम ने बताया कि स्वच्छ जल नहीं आने से उनके गाँव के लोग बीमार पड़ रहे हैं। टंकी बनाने का काम कई साल से चल रहा है लेकिन अभी तक नहीं बनी। पुरे गाँव में आज तक किसी के घर एक बून्द भी सरकारी जल नहीं आया। जिनका बजट है उन्होंने निजी सबमर्सिबल लगाए हुए हैं और बाकी ग्रामीण नलकों से निकलने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। सरकार के सारे दावे झूठे हैं जब किसी के घर पानी ही नहीं आया तो दावे किस बात के किये जा रहे। गाँव में पाइप लाइन बिछी हुई लेकिन वह भी कहीं-कहीं। ग्रामीण महताब का कहना है कि सभी ग्रामीण अपने घरों में लगे निजी सबमर्सिबलों से पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। गाँव में पांच साल पहले पाइप लाइन बिछाकर कनेक्शन किये हुए हैं लेकिन इन पाइप में आज तक टोंटी/ नल नहीं लगा। पांच साल बाद भी सरकारी नलकूप नहीं चला। इसकी वजह क्या है यह किसी ग्रामीण को नहीं पता। बुजुर्ग जगपाल सिंह ने बताया कि सभी लोग निजी स्रोत से निकले पानी का इस्तेमाल करते है। सरकारी पानी नहीं मिल रहा। गाँव में टंकिया/ पानी के कनेक्शन तो लगे हुए लेकिन चार साल में एक बून्द भी पानी नहीं आया। ओमपाल ने बताया कि जून महीने में सरकारी नलकूप लगे हुए चार हो जायेंगे लेकिन इन चार सालों में इस नलकूप से एक बून्द पानी नहीं निकला। ग्राम प्रधान से बात होती तो वे अफसरों और ठेकेदार की लापरवाही बता देते हैं। उनके घर में सिर्फ निजी नलके का ही पानी इस्तेमाल हो रहा है।
इसी बीच हमने एक ग्रहणी प्रियंका से बात की तो उसने भी “हर घर नल का जल’ योजना का चिट्ठा खोल दिया। प्रियंका बताती हैं कि घरों में सबसे ज्यादा पानी का इस्तेमाल महिलाये करती हैं। उनके गाँव में सरकारी पानी की टंकी का निर्माण पिछले चार-पांच साल से चल रहा है लेकिन कुछ दिन काम चलता है और 8-10 महीने तक बंद रहता है। सरकारी नलकूप लगाया हुआ है पुरे गाँव में पाइप लाइन बिछी हुई लेकिन पानी एक बून्द भी नहीं है। मज़बूरी वश उन्हें पुराने सरकारी नलके से पानी भरना पड़ता है। नलकों से दूषित पीला पानी निकलता है जिससे कई तरह की बीमारियां फ़ैल रही हैं। कपडे धोने से लेकर खाना बनाने तक पीला दूषित पानी ही इस्तेमाल करना पड़ता है। जब उनके गाँव में सरकारी नलों के लिए पाइप लाइन दबी तो उन्हें सरकार की ओर से स्वच्छ जल मिलने की उम्मीद जगी लेकिन नलकूप लगने और पाइप लाइन बिछने के पांच साल भी उनके घरों में स्वच्छ जल नहीं पहुंचा। घरों के आगे हुए नलों के कनेक्शन सूखे पड़े हुए हैं।
हम गाँव में थोड़ा आगे बढे और रेनू नाम की ग्रहणी से बात की तो उसने बताया कि उनके घर में पाइप लाइन और कनेक्शन तो पहुँच गए लेकिन पानी नहीं आने से पाइप भी जंग खा रहे हैं। नलकों से निकलने वाला पानी पीला होता है जिसके चलते उसे उबाल कर पीना पढता है। दूषित पानी पीने से बिमारी फ़ैल रही हैं। ग्रहणी सन्देश ने बताया कि नलकों से निकलने वाला पानी खराब है जिसको पी नहीं सकते। नलके से निकलने के कुछ देर बाद पीला हो जाता है। शुध्द पाने नहीं मिलने से बहुत परेशानी हो रही है। नलके के पाने से सिर्फ कपडे धोते हैं खाना नहीं बना सकते। नलकूप लगने के बाद भी सरकारी पानी बंद पड़ा है। इस बाबत ग्राम प्रधान चौधरी राजकुमार ने बताया कि उनके गाँव में टंकी को बनाने के लिए पांच ठेकेदार आ चुके हैं लेकिन पांच साल में टंकी तैयार नहीं हुई। अगर जल निगम चाहे तो टाइम टेबिल से हिसाब से नलकूप चलाकर ग्रामीणों स्वच्छ जल मुहैया करा सकता है लेकिन पांच साल में एक दिन भी ग्रामीणों को सरकारी नलकूप का पानी नसीब नहीं हुआ। “हर घर नल से जल” योजना के तहत बनाई जा रही टंकी की पूरी जानकारी शासन-प्रशासन को है। पांच साल पहले जब वे प्रधान चुन कर आये थे उसके छह महीने बाद ही नलकूप लगाकर टंकी बनाने का काम शुरू हो गया था। पुरे गाँव में पाइप लाइन बिछ गई थी। घर घर पानी के कनेक्शन दे दिए थे। लेकिन टंकी आज तक पूरी नहीं हुई जबकि इसको बनाने में चार ठेकेदार बदले जा चुके हैं और पांचवा ठेकेदार आया हुआ है।
ग्राम प्रधान राजकुमार के मुताबिक़ टंकी को पूरा करने और पानी सप्लाई के लिए बार बार अधिकारियो को लिखित और मौखिक शिकायते की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिलाधिकारी, जल निगम, अधीक्षण अभियंता समेत कई बड़े अधिकारियों अपील कर चुके हैं कि टंकी बनाने का काम समय पर पूरा कर लिया जाए। ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ और शुध्द पीने का पानी मिल सके। मैंने प्रयास किया लेकिन ये हमारा और हमारे गाँव का का दुर्भाग्य ही है कि पांच साल में भी हमें पीने का शुध्द पाने नहीं मिला। उन्होंने बताया कि अगर “हर घर नल से जल” पहुंचता तो पिछले दिनों जान शक्ति मंत्री के साथ दुर्व्यवहार नहीं होता। विधायक और ग्रामीणों के पूछने पर केबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जवाब देने को नहीं मिला। इस टंकी का इन्तजार करके ग्रामीणों ने महंगे दामों में सबमर्सिबल और नलके लगाने पड़े। लेकिन नलको से भी शुध्द पानी नहीं मिलता। यहाँ वाटर लेवल भले ऊपर हो लेकिन 250-300 फ़ीट से भी शुद्ध पानी नसीब होता। पाइप लाइन दबाते वक्त जल निगम ने गाँव की सारी गालियां तोड़ दी और पाइप दबाने के बाद छोड़ दिया। जबकि नियमानुसार पाइप दबाने के बाद जल निगम को ही टूटी गालियां बनानी होती है। लेकिन वे सब हमने अपनी प्रधान निधि से बनवानी पड़ी।
हर घर नल योजना की हकीकत कांकरकुई गाँव में ही नहीं जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर गाँव छपरेहड़ी में भी दम तोड़ रही है। जहां करीब डेढ़ साल से नलकूप लगा हुआ है। नलकूप चलाने के लिए लाखों रूपये की लागत से सोलर प्लांट लगा हुआ मिला। लेकिन ग्रामीणों का दुर्भाग्य इतना कुछ होने बाद भी छपरेहड़ी गाँव के ग्रामीणों को भी स्वच्छ जल नसीब नहीं हुआ। पुरे गाँव में डेढ़ साल पहले पाइप लाइन बिछा दी गई। घरों के बाहर पाइप निकाल कर कनेक्शन किये गए बावजूद इसके घरों में पानी नहीं पंहुचा। ग्रामीणों ने बताया कि डेढ़ साल पहले उनके गाँव में सरकारी योजना के तहत स्वच्छ जल के लिए सरकारी नलकूप लगाया गया था। ग्रामीण कीरतपाल सैनी ने बताया कि गाँव में लगे नलकूप की सफल टेस्टिंग भी हुई लेकिन उसके बाद न तो नलकूप पर कोई ऑपरेटर आया और ना ही नलकूप से पानी निकला। जब गाँव में सरकारी नलकूप लगा था तो ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें भी शहर की तरह सरकारी नलकूप का शुध्द पानी मिल पायेगा। लेकिन शासन-प्रशासन की बेरुखी के चलते ग्रामीण डेढ़ साल से पानी का इन्तजार कर रहे हैं।
ग्रामीण योगेंद्र सिंह का कहना है कि सभी ग्रामीण नलकों से पानी निकाल कर इस्तेमाल कर रहे है। गाँव में पाइप लाइन बिछने के बाद टेस्टिंग की गई। लेकिन इसके बाद भी नलकूप को नहीं चलाया जा रहा। सालों से ट्यूबल ऐसे पड़ा हुआ है। जिसकेना चलने से ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्ग महिला अजमेरती का कहना है कि इस नलकूप को लगे हुए 2 साल हो गए है लेकिन अभी तक चलाया नहीं है। एक दिन जनरेटर सेट से नलकूप चलाकर दिखाया था उस दिनों तो टंकिओं में पानी आया था लेकिन उसके बाद एक बून्द नहीं आया। जल निगम की अनदेखी के चलते गाँव में पाइप लाइन का काम भी पूरा नहीं हुआ है। दो साल से ये पाइप भी यहीं पड़े हुए हैं। पुराने नलकों से पीला पानी आता है जिससे बिमारी फैलने का डर यहां के ग्रामीणों को सता रहा है। रात को भर के रखें तो सुबह तक पीला पड़ जाता है।
ग्रामीणों से बातचीत के बाद हमने दो साल पहले लगाए गए नलकूप परिसर का जायजा लिया तो वहां की बदहाली देखकर हैरान रह गए। नलकूप परिसर में ग्रामीणों के मवेशी बांधे हुए मिले। तो वहीं परिसर में गोबर के उपले फैले हुए थे। इतना ही नहीं नलकूप के लिए बनाये गए कमरों में दरवाजे और खिड़कियाँ भी नहीं मिली। नलकूप के कमरे में ग्रामीणों ने लकड़ियां और घास फूंस भरा हुआ है। जहां से स्वच्छ जल की उम्मीद लगी है वहां कहीं स्वच्छता नहीं मिली।हालाँकि नलकूप परिसर में लाखों की कीमत का सोलर प्लांट जरूर लगा मिला। लेकिन सोलर पैनलों का कनेक्शन नहीं जोड़ा गया जिससे नलकूप की मोटर चलाई जा सके। करोड़ों रूपये की लागत से तैयार नलकूप और सोलर प्लांट धूल फांक रहा है। नलकूप पर ऑपरेटर तो दूर नलकूप चलाने के उपकरण भी नहीं मिले। दो साल से लगा नलकूप छपरेहड़ी गाँव के ग्रामीण अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
गौरतलब है कि हर घर जल योजना (जल जीवन मिशन) भारत सरकार द्वारा 2019 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय योजना है, जिसका लक्ष्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में पाइप से साफ, सुरक्षित और पर्याप्त पीने का पानी पहुंचाना है। इस पहल का मकसद महिलाओं और बच्चों पर पानी लाने का बोझ कम करना, स्वास्थ्य में सुधार करना और ग्रामीण इलाकों में जीवन की कुल गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इस योजना को जल शक्ति मंत्रालय राज्य सरकारों के सहयोग से लागू कर रहा है, और यह जल संसाधन प्रबंधन और पानी की गुणवत्ता पर भी ध्यान केंद्रित करती है। जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक डॉ. बृजभूषण राजपूत के बीच मामला ज़मीनी स्तर पर शांत हो गया हो, लेकिन सोशल मीडिया पर राजनीतिक ड्रामा तेज़ हो गया है।
वहीं जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि उत्तर प्रदेश में “हर घर जल” की योजना चल रही है। जनपद सहारनपुर में तीन एजेंसियों के माध्यम से इस योजना को सफल बनाने का काम चल रहा है। वर्तमान में जनपद की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में “हर घर जल” योजना का काम चल रहा है। नलकूप लगाने के साथ पाइप लाइन दबाने का काम किया जा रहा है। 90 प्रतिशत कार्य लगभग कम्प्लीट है। जहां 100 प्रतिशत कार्य कम्प्लीट हो चुका है वहां टेस्टिंग के बाद पानी सप्लाई के निर्देश प्राप्त हो चुके हैं। बजूद इसके समीक्षा बैठक कर यह प्रयास किया जा रहा है कि जो योजना कम्प्लीट हो चुकी है वहां पर सप्लाई सुचारु की जाये। जहां अभी काम चल रहा है उन ग्रामों में पाइप डालने के बाद तोड़ी गई सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है। टंकी निर्माण समेत आगे के सभी कार्य आगे के चरणों में करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जहां पर भी ठेकेदारों द्वारा सड़कों को काट कर पाइप लाइन बिछाई जाती है वहां 2 महीने के भीतर सड़क की मरम्मत करनी है। कई जगहों पर ऐसे ठेकेदारों ने जहाँ लापरवाही की है उनके खिलाफ पब्लिक प्रॉपर्टी डेमेज करने की एफआईआर कराई गई है। बावजूद इसके अगर कोई शिकायत सामने आती है तो तत्परता से उनके खिलाफ कार्यवाई की जा रही है।
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