आगरा : यूपी पुलिस ने एक और बड़े धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह में शामिल और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, धर्मांतरण गिरोह का मास्टरमाइंड आयशा और मोहम्मद अली है। दोनों ने धर्मांतरण के लिए एक संगठित गिरोह बनाया है, जिसमें बड़े लोग शामिल हैं। आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि आगरा पुलिस ने छह राज्यों में छापेमारी के लिए 50 पुलिसकर्मियों की 10 टीमें बनाई थीं। पुलिस टीम ने गोवा से आयशा नाम की एक महिला को पकड़ा। इसके बाद गिरोह में शामिल नौ अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

उन्होंने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की गई तो सभी ने गिरोह में अलग-अलग काम करने की जानकारी दी। जिसमें कोई युवतियों को फंसाता था, तो कोई धन उगाही करता था। किसी का काम किराए पर मकान दिलाना था, तो कोई शादी के लिए लड़के ढूंढता था। किसी का काम दस्तावेज तैयार करवाना था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि सगी बहनों की शादी की तैयारी चल रही थी। परिवार बेटियों के जन्म से खुश है, लेकिन, वे किसी से कुछ नहीं बोल रहे हैं।
असली नाम एसबी कृष्णा है, जो मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली है। आरोपी एसबी कृष्णा ने धर्म परिवर्तन के बाद आयशा नाम अपना लिया था। वह धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलती है। गोवा में उसका घर है। इसके साथ ही, वह कोलकाता के बैरकपुर निवासी अली हसन उर्फ शेखर राय की कथित पत्नी है। आयशा धर्मांतरण गिरोह की सरगना है। उसका काम विदेश से फंडिंग लाना और गिरोह के सदस्यों को धर्मांतरण के लिए पैसे देना है।

आरोपी अली हसन उर्फ शेखर राय कचहरी में कर्मचारी है। वह आयशा से जुड़ा हुआ है। वह गिरोह का दूसरा सरगना है। वह गिरोह के सदस्यों को कानूनी मामलों में मदद करता है। समाज के बड़े लोगों से उसके संबंध हैं। वह आयशा से पैसे लेकर गिरोह के सदस्यों को देता है। आरोपी इब्राहिम धर्मांतरण गिरोह का मुख्य सदस्य है, जो आयशा से सीधा जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसकी एक आईडी है। इसके ज़रिए वह लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाता है। उसने ही सगी बहनों को आगरा से कोलकाता बुलाया था। वह रीत बानिक उर्फ़ इब्राहिम का एजेंट है। वह धर्मांतरण के लिए लाए गए लोगों को कोलकाता की एक झुग्गी बस्ती में ठहराता है। पहले वह उन्हें एक होटल में ठहराता है। ओसामा ने आगरा की सगी बहनों को झुग्गी बस्ती में घर दिलवाया था।
आरोपी रहमान कुरैशी इंटरमीडिएट फेल है, जो सुन्ना नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाता है। जिसके एक लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं। वह इस यूट्यूब चैनल पर धर्मांतरित लड़के-लड़कियों के वीडियो अपलोड करता है। जिसमें दिखाया जाता है कि वे अपने मूल धर्म में वापस लौटने के बाद कितने खुश हैं। वह गिरोह के लिए राजस्थान का काम संभालता है। कई लोगों के धर्मांतरण में उसकी अहम भूमिका रही है। फिलहाल, उसने एक युवा डॉक्टर को अपने जाल में फँसाया है। वह खुद भी धर्मांतरित है। पहले वह कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था। कलीम सिद्दीकी को धर्मांतरण के आरोप में एटीएस ने जेल भेज दिया था। आरोपी अब्बू तालिब फिलहाल उत्तर प्रदेश में गिरोह के लिए काम कर रहा था। धर्मांतरण के बाद, वह लोगों के दस्तावेज़ बनवाने में मदद करता था।
आरोपी मुस्तफा का सीधा संबंध रीत बनिक उर्फ इब्राहिम से है। जब सगी बहनें आगरा से दिल्ली पहुँचीं, तो उन्हें तीन दिन एक होटल में ठहराया गया। वहाँ से उन्हें बस से बिहार भेज दिया गया। बिहार से दोनों बहनें ट्रेन से कोलकाता पहुँचीं। यह व्यवस्था मुस्तफा ने की थी। आरोपी जुनैद कुरैशी गिरोह का सक्रिय सदस्य है। वह जयपुर में मोहम्मद अली के लिए काम करता है। वह उसके लिए लड़कियों को फंसाता है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि गठित की गई पुलिस टीम के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। जिसके ज़रिए सभी टीमों के सदस्य एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। यह मामला पुलिस के लिए एक ब्लाइंड केस जैसा था। दोनों बहनें अपने मोबाइल फोन साथ नहीं ले गई थीं।
उन्होंने बताया कि घर से निकले हुए कुछ समय बीत चुका था। वे अपने असली नामों से सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे। परिजनों से बातचीत में कई जानकारियाँ मिलीं। जिसके आधार पर साइबर सेल ने काम शुरू किया। इंस्टाग्राम पर एक कनेक्टिंग रिवर्ट आईडी मिली। पुलिस ने उसे खंगाला तो कोलकाता का पता मिला। उस आईडी से जुड़े अन्य नामों की प्रोफाइल खंगालनी शुरू की तो पता चला कि एक लड़की ने धर्म परिवर्तन के लिए संपर्क किया था। उस आईडी से एक रिस्पॉन्स मिला था। पुलिस ने कड़ियाँ जोड़नी शुरू कीं। जिससे आयशा का सुराग मिला। उसके ज़रिए बैंक खातों की जानकारी मिली। एक-एक करके गिरोह के सातों आरोपियों के खिलाफ सुराग मिलते गए। जिस पर अदालत से सभी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट लिए गए।

