लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने संकल्प लिया है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत, छोटे और कम संसाधन वाले स्कूलों को आस-पास के स्कूलों से जोड़ा जा रहा है ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस युग्मन से न केवल बच्चों को स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, खेल के अवसर और सहकर्मी शिक्षा जैसे अनुभव मिलेंगे, बल्कि शिक्षक-छात्र अनुपात भी बेहतर होगा। युग्मन से इन स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प के सभी 19 मानकों जैसे शौचालय, पेयजल, फर्नीचर, डिजिटल शिक्षा, बाल वाटिका आदि में सुधार संभव हो सकेगा।

भवनों की सुरक्षा के लिए सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है और जर्जर भवनों को हटाया जा रहा है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि बच्चों को स्कूल पहुँचने में कोई परेशानी न हो। रेलवे क्रॉसिंग, हाईवे या नाले जैसी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए युग्मन किया जा रहा है। युग्मित विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के सभी 19 बिंदुओं पर सुधार सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार कृतसंकल्प है। इससे हर बच्चे को स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल का मैदान जैसी सुविधाएँ मिल सकेंगी। यदि किसी क्षेत्र में युग्मन संबंधी कोई समस्या आती है, तो उसका भी तुरंत समाधान किया जा रहा है।
योगी सरकार राज्य में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। सरकार के इन प्रयासों का असर असर की रिपोर्ट में भी दिखाई दे रहा है। असर की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में उत्तर प्रदेश तमिलनाडु और गुजरात के साथ शामिल हो गया है। छात्रों की पठन दक्षता और गणितीय दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति 2018 के 57.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 71.4 प्रतिशत हो गई है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति 2018 के 59.5 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई है। शिक्षकों की उपस्थिति भी 2024 में 85.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। स्कूल युग्मन के बाद शिक्षा के स्तर में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार, छोटे और कम संसाधन वाले स्कूलों को निकटवर्ती बड़े और बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों के साथ एकीकृत करने की सिफारिश की गई है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 5 जून, 2024 को जारी एक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि 50 से कम नामांकन वाले कई छोटे स्कूलों में बच्चों और संसाधनों का विलय कर दिया जाए, तो बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा। नीति में यह भी कहा गया है कि छोटे, सीमित उपयोग वाले स्कूलों को बड़े, अधिक प्रभावी स्कूलों के साथ विलय करके शिक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए।

