जालसाजों का बड़ा कारनामा, ज़िंदा युवक को दस्तावेजों में किया मृत घोषित, फर्जी बीमा क्लेम करने का भंडाफोड़

संभल : बुधवार को पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने संभल जिले के बहजोई स्थित अपने कार्यालय में फर्जी बीमा मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस जांच में दिल्ली निवासी त्रिलोक का मामला सामने आया। उसकी मौत के बाद गिरोह ने अस्पताल के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीमा क्लेम करने की कोशिश की। खुलासा तब हुआ जब धर्मेंद्र नाम का एक और नाम सामने आया। वह जीवित था, लेकिन दस्तावेजों में उसे मृत घोषित कर दिया गया था।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि धर्मेंद्र मुंबई में मजदूरी करता है। इस गिरोह के सदस्य शाहरुख, कल्पना और पंकज कुमार ढाली ने इलाज के नाम पर धर्मेंद्र से आधार और पैन कार्ड ले लिया। इसके बाद फर्जी पता अपडेट कराया। फिर जनवरी से जुलाई 2024 के बीच उसके नाम पर आईसीआईसीआई, टाटा एआईए, रिलायंस निप्पॉन और एचडीएफसी की बीमा पॉलिसियां बनवाईं।

यह पॉलिसी 90 लाख रुपये की थी। इस गिरोह ने 28 नवंबर 2024 को दिल्ली नगर निगम से धर्मेंद्र का ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ भी जारी करवा लिया। इतना ही नहीं, गिरोह ने धर्मेंद्र के नाम पर दो पर्सनल लोन भी पास करवा लिए। इनमें से एक लोन 12.21 लाख रुपये का और दूसरा 4.93 लाख रुपये का था।

पुलिस जाँच में पता चला कि धर्मेंद्र को लोन तो मिल गया, लेकिन उसे इसकी भनक तक नहीं लगी। गिरफ्तार आरोपी पंकज कुमार ढाली खुद को “लोन एजेंट” बताता था। वह गरीब लोगों को बताता था कि वह एक बंद हो चुकी फर्जी कंपनी का कर्मचारी है। उनके नाम पर लोन लेकर पूरी रकम हड़प लेता था।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि आरोपी पंकज ने पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के गुरदासपुर, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, बरेली, बागपत, मुरादाबाद जैसे कई जिलों में फर्जी दस्तावेजों से लोगों को कर्मचारी बताकर बीमा और लोन का झांसा दिया है। जांच के दौरान पंकज के पास से 33 पैन कार्ड, 28 आधार कार्ड और 39 चेक बुक भी बरामद की गईं। यह एक अंतरराज्यीय बीमा माफिया गिरोह है। पिछले 6 महीनों में ऐसे मामलों में 67 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

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