फतेहपुर : उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में सोमवार को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल के समर्थक विवादित मजार पर पहुँच गए। इन लोगों ने इसे मंदिर बताकर तोड़फोड़ की। पुलिस ने इस मामले में 150 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बुधवार सुबह पुलिस ने मजार जाने की तैयारी कर रहे 16 कांग्रेस नेताओं को रोक लिया।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष और पार्टी के कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। कोतवाली प्रभारी तारकेश्वर राय ने बताया कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 10 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। उन्होंने कमेटी को बुधवार को फतेहपुर स्थित विवादित स्थल पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लेने को कहा था।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के आने की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। जिले की सीमा छिवली पुल और बरौरी टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। बुधवार सुबह प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए। अधिकारियों ने जाँच और पूछताछ शुरू कर दी है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सुबह कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस नगर अध्यक्ष आरिफ गुड्डा, पं. रामनरेश महाराज, आनंद सिंह गौतम, आदित्य श्रीवास्तव, मोहसिन खान, अजय कुमार बच्चा, हिदायतुल्लाह, सईद चाचा, दीपक श्रीवास्तव, वसीर अहमद, नौशाद अहमद, अमीरुल जमा खान, मोहम्मद आरिफ, सैयद अहमद, इमरान सिद्दीकी, इरसत खान को हिरासत में लिया और थाने ले गए।
कोतवाली प्रभारी तारकेश्वर राय का कहना है कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। कांग्रेस नेता खुद थाने पहुँचे थे। सभी को सम्मान के साथ बैठाया गया है। फतेहपुर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी को नजरबंद कर दिया गया। नजरबंदी के दौरान जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी ने कहा कि भाजपा के लोगों ने एक धर्मस्थल को मंदिर बताकर तोड़फोड़ की।
अराजकता फैलाई गई और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। हमें हिरासत में लिया जा रहा है और वहाँ जाने से रोका जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। तामेश्वर मंदिर मेला समिति प्रभारी विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि जिस स्थान पर समाधि बनी है, वह ठाकुर सिद्धपीठ मंदिर है। तीन दिन पहले पुलिस अधीक्षक के आदेश पर 10 नामजद सनातनियों समेत 150 अज्ञात लोगों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जाए। अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो जिले भर के लाखों सनातन अनुयायी आंदोलन को मजबूर होंगे।
इतिहासकार सतीश द्विवेदी का कहना है कि यह समाधि मुगल बादशाह औरंगजेब के फौजदार अब्दुस समद की है। हिंदू संगठन और भाजपा जिलाध्यक्ष इसे मंदिर बता रहे हैं। वहीं, इतिहासकार सतीश द्विवेदी और स्थानीय दस्तावेजों के अनुसार यह मुगलकालीन समाधि है। इतिहासकार सतीश द्विवेदी ने बताया कि 1969 में यह जमीन फतेहपुर के असौथर में रहने वाले एक हिंदू राजपूत परिवार के नाम थी। 20 अप्रैल 2012 को गाटा संख्या 753 पर स्थित यह ‘समाधि’ सरकारी दस्तावेजों में राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में दर्ज हो गई। मोहम्मद अनीश को इसका मुतवल्ली बनाया गया। इसका क्षेत्रफल 10 बीघा 17 बिस्वा है। यह सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। यह एक संरक्षित संपत्ति है।

