
हाईकोर्ट का आदेश मिलते ही प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी और शनिवार को कार्रवाई को अंजाम दिया गया। जब बुलडोजर से मकान ढहाना शुरू हुआ तो ग्राम प्रधान पक्ष ने कुछ देर तक विरोध किया, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा। शनिवार को एसडीएम डॉ. पूर्वा और सीओ शशि प्रकाश भारी पुलिस बल के साथ ग्राम प्रधान नीरज राणा के आवास पर पहुँचे। प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में बुलडोज़र चलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान का मकान कुछ ही देर में मलबे में तब्दील हो गया। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
इस कार्रवाई को लेकर गाँव में चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल की ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना बेहद ज़रूरी था। वहीं, ग्राम प्रधान के समर्थकों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और प्रशासन ने विरोधियों के दबाव में कार्रवाई की है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की गई है और सरकारी ज़मीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

