सहारनपुर : स्मार्ट सिटी सहारनपुर के महापौर डॉ अजय सिंह द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यलय के क्लर्क का कॉलर पकड़ बाहर निकालने का मामला तूल पकड़ने लगा है। जहां निगम कर्मचारियों ने हड़ताल कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है वहीं महापौर अजय सिंह ने क्लर्क के खिलाफ कार्यवाई के लिए नगरायुक्त को पत्र लिखा है। मेयर डॉ. अजय कुमार सिंह ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में गड़बड़ियों को लेकर नगर निगम कमिश्नर को कड़ा लेटर भेजा है। इसमें क्लर्क को हटाने, रिकॉर्ड सील करने और पांच साल पुराने सर्टिफिकेट की जांच करने के साफ निर्देश दिए हैं।

आपको बता दें कि शुक्रवार को महापौर अजय सिंह नगर निगम के जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यलय के निरिक्षण के लिए गए थे। जहां जन्म मृत्यु प्रमाण पत्रों और लेखों में गड़बड़ी पाई गई थी। जिसको लेकर महापौर अजय सिंह ने क्लर्क सुरेंद्र सिंह को न सिर्फ जमकर फटकार लगाईं थी बल्कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्यवाई की चेतावनी दी थी। चेतावनी को स्वीकार करते हुए क्लर्क सुरेंद्र सिंह ने देख लेने को कहा था। क्लर्क का जवाब सुनते ही महापौर का गुस्सा फुट पड़ा और क्लर्क का कॉलर पकड़ दफ्तर से बाहर खींच लिया। जिसके बाद से नगर निगम में शुक्रवार का पूरा दिन तनाव भरा रहा। क्लर्क सुरेंद्र सिंह को पकड़ कर महापौर के दफ्तर में ले जाया गया। जिसके बाद उसकी तबियत बिगड़ गई। साथी कर्मचारियों ने जैसे तैसे समझा बुझा कर सुरेंद्र सिंह घर पहुंचाया।

शनिवार की सुबह जब नगर निगम खुला तो निगम कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। देखते ही देखते नगर निगम के सभी कर्मचारी हड़ताल स्थल पर जमा हो गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने पर बैठे कर्मचरियों ने महापौर को बुलाने और अपने कृत्य पर माफ़ी मांगने की मांग की। लेकिन सुबह से शाम तक न तो महापौर नगर निगम धरना स्थल पहुंचे और ना ही उन्होंने आना कोई सन्देश भेजा। बावजूद इसके महापौर अजय सिंह ने अचानक इंस्पेक्शन और हंगामे के बाद जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में गड़बड़ियों को लेकर नगर निगम कमिश्नर को कड़ा लेटर भेजा है। इससे डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया है। मेयर के लेटर के मुताबिक, साल 2024-25 और 2025-26 के जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग के रजिस्टर अनसर्टिफाइड पाए गए और उनमें पेज नंबरिंग भी नहीं थी। कई रजिस्टर के शुरू और आखिर के पेज खाली पाए गए। डिपार्टमेंट का एक रजिस्टर न होना भी एक बड़ी लापरवाही मानी गई।
इंस्पेक्शन के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह मिली कि डिपार्टमेंट ने 30-40 साल पुराने बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए थे। जब ओरिजिनल डॉक्यूमेंट मांगे गए, तो क्लर्क सुरेंद्र कुमार ने अनजान बनने का नाटक किया और देने से मना कर दिया। मेयर ने इस पर गहरी चिंता जताई और इसे एक संदिग्ध तरीका बताया। लेटर में यह भी बताया गया कि रजिस्टर में एंट्री क्लर्क के बजाय कॉन्ट्रैक्ट वर्कर बिलाल और कर्मचारी जुल्फकार ने की थी, जिससे सर्टिफिकेट के भरोसेमंद होने पर सवाल उठते हैं। साथ ही, शिकायतें मिलीं कि सुरेंद्र कुमार ने योग्य एप्लिकेंट्स को बेवजह परेशान किया। मेयर ने म्युनिसिपल कमिश्नर को सुरेंद्र कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने, पिछले पांच सालों में जारी सभी सर्टिफिकेट की इंडिपेंडेंट जांच करने और जांच पर असर न पड़े, यह पक्का करने के लिए संबंधित कर्मचारियों को सेंसिटिव पोस्ट से हटाने का निर्देश दिया है। इस मामले ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के रिकॉर्ड रखने के सिस्टम में गड़बड़ियों को सामने लाया है।