20 अगस्त को सागर भटनागर के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का एक समूह गंगोह से रवाना हुआ। इनमें शैंकी प्रजापति (29), भावेश कश्यप (28), उमंग गर्ग (26), राकेश भटनागर (22), अमन गर्ग (21) शामिल थे। अंबेहटा निवासी अमित भटनागर (20), राजू भटनागर (26), दिल्ली निवासी मोहित कश्यप (23) और गाँव झाड़वान निवासी सनी चौधरी (27) भी जत्थे के साथ थे। जत्थे ने 15 किलोमीटर के छोटे रास्ते की बजाय 45 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग से यात्रा करने का फैसला किया।
इसी बीच रास्ते में भूस्खलन ने श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। बुधवार देर रात जत्थे में शामिल एक युवक ने किसी तरह अपने परिजनों को फोन पर हादसे की जानकारी दी। उसने बताया कि छह लोग सुरक्षित हैं। आगे चल रहे सागर भटनागर पर अचानक एक पत्थर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। साथ ही, तीन साथियों शैंकी प्रजापति, अमित भटनागर और सनी चौधरी का भी कोई सुराग नहीं लगा है। इसके बाद उनका भी संपर्क टूट गया।
इस दुखद समाचार से गंगोह में शोक की लहर दौड़ गई। सागर भटनागर के घर रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार सुबह लापता श्रद्धालुओं के परिजन तीन वाहनों में चंबा के लिए रवाना हो गए। शाम करीब 5 बजे शैंकी प्रजापति के भाई पंकज प्रजापति ने बताया कि शैंकी और बाकी तीन लापता युवक भरमौर में सकुशल मिल गए हैं। विकास भटनागर ने बताया कि उनके भाई सागर भटनागर, जो किराना व्यापारी हैं, धार्मिक प्रवृत्ति के थे। वह दूसरी बार मणि महेश तीर्थ यात्रा पर गए थे। वह इलाके में एक प्रसिद्ध भजन गायक के रूप में जाने जाते थे। उनके परिवार में पत्नी और एक साल की बेटी है।
गंगोह के गांधीनगर गाँव निवासी संजय कश्यप (22), जो रसोइया का काम करते थे, अभी भी लापता हैं। वह जगाधरी से एक समूह के साथ मणि महेश तीर्थ यात्रा पर गए थे। चार दिन पहले अपनी आखिरी कॉल में उन्होंने अपने परिवार को बताया था कि यहाँ एक बड़ा पत्थर गिरा है, चारों तरफ पानी है, बचना मुश्किल लग रहा है। तब से, परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा है। इस पूरे मामले में सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महासचिव दीपांशु गोयल और उनके भाई वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर आकाश मणि गोयल लगातार सक्रिय रहे।

