कार्यक्रम में मौजूद एनडीडीबी के चेयरमैन मीनेश शाह ने नोएडा में आयोजित विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन, 2022 के आयोजन में मुख्यमंत्री से मिले सहयोग के लिए आभार जताया और उत्तर प्रदेश में एनडीडीबी द्वारा संचालित विभिन्न दुग्ध विकास परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश में जिन तीन डेयरी प्लांट और एक पशु आहार फैक्ट्री को संचालन के लिए एनडीडीबी को सौंपा गया है, वे आने वाले वर्षों में प्रदेश की सबसे अधिक लाभकारी और मॉडल इकाई के रूप में स्थापित होंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओं को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने झांसी की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी, आगरा और गोरखपुर जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर महिलाएं दुग्ध उत्पादन में बहुत अच्छा काम कर रही हैं। उन्होंने इस काम में मदद के लिए एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने कृषि और पशुपालन पर ध्यान नहीं दिया। इससे यह क्षेत्र पिछड़ गया और पशुपालक किसान भी निराश हो गए। इससे प्रदेश में पशुओं की संख्या भी कम होने लगी। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में न तो इच्छाशक्ति थी और न ही दूरदर्शिता। लेकिन 2014 के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आई तो कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए। अब यह क्षेत्र युवाओं के लिए भी आकर्षक बन गया है और रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने पीसीडीएफ (राज्य डेयरी संगठन) से एनडीडीबी की अच्छी योजनाओं को अपनाने को कहा। इससे दुग्ध उत्पादन क्षेत्र का और विस्तार होगा और इससे जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने, पशुधन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी जैसी सक्षम और अनुभवी संस्था को संचालन सौंपने से इन इकाइयों में तकनीकी दक्षता, व्यावसायिक पारदर्शिता और किसानों को सीधा लाभ सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि राज्य की पशुधन संपदा और विशाल दुग्ध उत्पादन क्षमता को योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाए तो उत्तर प्रदेश न केवल देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बन सकता है बल्कि वैश्विक डेयरी मानचित्र पर अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर सकता है। एनडीडीबी के साथ यह एमओयू उस दिशा में एक ठोस, दूरदर्शी और व्यावहारिक कदम है।
इन इकाइयों का संचालन एनडीडीबी को सौंपने से किसानों को समय पर भुगतान, स्थानीय सहकारी समितियों की भागीदारी, संसाधनों का नियोजित उपयोग, उपकरणों की सुरक्षा और अनावश्यक व्यय में कमी जैसे महत्वपूर्ण लाभ सुनिश्चित होंगे। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और दूध उत्पादों की गुणवत्ता और उपलब्धता में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इस मॉडल के तहत राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और राज्य और किसानों को समान रूप से राजस्व बंटवारे का लाभ मिलेगा।

