फिरोजाबाद : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) का असर फिरोजाबाद के कांच उद्योग पर देखने को मिल रहा है। कांच नगरी के नाम से मशहूर फिरोजाबाद की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात पर निर्भर है। यहाँ बनने वाले लगभग 70 प्रतिशत कांच उत्पाद अमेरिका भेजे जाते हैं। ऐसे में 50% टैरिफ लगने से उद्योग पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
कांच निर्माता निर्यात संघ के अध्यक्ष मुकेश बंसल (टोनी) ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में शहर के प्रमुख निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया और टैरिफ से उत्पन्न संकट पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। मुकेश बंसल टोनी ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने एकमत से चिंता व्यक्त की है कि बढ़े हुए टैरिफ, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक आर्थिक मंदी और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण कांच उद्योग गंभीर संकट में है। निर्यात में गिरावट का सीधा असर कारीगरों और मजदूरों की आजीविका पर पड़ सकता है। निर्यातक मुकेश बंसल ने बताया कि टैरिफ बढ़ोतरी के कारण 300 करोड़ रुपये के ऑर्डर रद्द हो गए हैं।
संकटग्रस्त उद्योग के लिए आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए।कांच उत्पादों के लिए निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ, सब्सिडी और कर राहत प्रदान की जानी चाहिए।अमेरिका के साथ कूटनीतिक व्यापार वार्ता के माध्यम से टैरिफ में छूट प्राप्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए।अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए। फिरोजाबाद का कांच उद्योग न केवल शहर की पहचान है, बल्कि हजारों कारीगरों और श्रमिकों की आजीविका का स्रोत भी है। अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे, तो कई लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निर्यातक अब सरकार की ओर देख रहे हैं।
गौरतलब है कि फिरोजाबाद शहर में 25 कांच निर्यात इकाइयाँ हैं, जो विभिन्न देशों को सालाना 1500 करोड़ रुपये तक का निर्यात करती हैं, जिसमें से 70 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। फिरोजाबाद से कांच की लकड़ी की वस्तुएं, चांदी की पॉलिश वाले फूलदान, क्रिसमस ट्री, एल्युमीनियम फिटिंग वाली लाइटें, क्षितिज वस्तुएं बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं

