POCSO एक्ट के तहत दर्ज है मुकदमा
एफआईआर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को नामजद किया गया है। आरोप है कि पिछले वर्ष एक नाबालिग सहित दो लोगों के साथ यौन उत्पीड़न किया गया। शिकायतकर्ताओं में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और दो अन्य शामिल बताए गए हैं। आरोप गुरुकुल और माघ मेला जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान उत्पीड़न से जुड़े हैं। यह कार्रवाई प्रयागराज में विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) के आदेश के बाद की गई। मामला POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है। शिकायत में दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं।
साजिश का आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर स्नान से रोके जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उन्होंने वाराणसी में मीडिया से बातचीत में एक तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि प्रयागराज का एक पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस ने 18 जनवरी से ही उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। उनका कहना है कि पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की और कोर्ट के आदेश के बाद ही कार्रवाई की।
प्रशासन पर भी लगाए आरोप
स्वामी सरस्वती ने यह भी आरोप लगाया कि वाराणसी विकास प्राधिकरण ने उन पर गोरक्षा अभियान से पीछे हटने का दबाव बनाया। उन्होंने पूरे प्रकरण को सुनियोजित साजिश करार दिया है। फिलहाल, मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की तारीख तय होने का इंतजार है। पुलिस और प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया आना बाकी है।

