सहारनपुर : शनिवार को सहारनपुर के माँ शाकम्भरी देवी विश्व विद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह जनमंच सभागार में गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शिक्षा को समाज सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति एवं राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते कहा कि अब बेटे और बेटी में कोई अंतर नहीं रहा। पहले ज़्यादातर परिवारों में यही माना जाता था कि बेटियाँ दूसरे घर चली जाती हैं, जबकि बेटे वंश को आगे बढ़ाते हैं। इसी वजह से परिवार सिर्फ़ बेटों की शिक्षा पर ही ध्यान देते थे, जबकि बेटियों की शिक्षा को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है और देश में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

उन्होंने जनमंच सभागार में मेधावी विद्यार्थियों को पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि आज बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित करने का भी आग्रह किया ताकि वे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें और विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सभी विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। भारतीय विश्वविद्यालय संघ के महासचिव प्रोफेसर पंकज मित्तल दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर यूजीसी के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक कुमार श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने बताया कि 2024-25 के दीक्षांत समारोह में कुल 90 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें 66 छात्राएँ और 24 छात्र शामिल थे, जो इस बार भी छात्राओं के उल्लेखनीय प्रदर्शन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। माँ शाकम्भरी देवी विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पाठ्यक्रमवार कुल 80 छात्रों को कुलपति स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 59 छात्राएँ और 21 छात्र शामिल हैं। वहीं जिनमें 4 छात्राएँ और 2 छात्रों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से नवाजा गया है। प्रायोजित/स्मारक स्वर्ण पदक 4 छात्रों को प्रदान किए गए।

कुलपति प्रोफेसर विमला वाई के अनुसार पदक प्राप्त करने में इस बार भी लड़कियों का दबदबा रहा है। यानि स्वर्ण पदकों की संख्या में लड़कियों ने बढ़त बनाई। कुलपति स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 73.75% लड़कियाँ और 26.25% लड़के थे। कुलपति स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 66.66% लड़कियाँ रहीं। उन्होंने कहा कि लोग पूछते हैं कि आपके बच्चों ने क्या किया। उनका डेटा रखना आपकी ज़िम्मेदारी है। जो लोग पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उनसे संपर्क करें और उनके मोबाइल नंबर रखें। क्योंकि वे जहाँ भी जाएँगे, आपके विश्वविद्यालय का नाम वहाँ होगा।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि माँ शाकम्भरी देवी की पावन धरा पर आकर मन को शांति मिलती है। शिवालिक पर्वत की तलहटी में बसे सहारनपुर स्थित माँ शाकंभरी विश्वविद्यालय में आने से न केवल भौगोलिक सुंदरता बल्कि मन को शांति भी मिलती है। जिन लोगों को पुरस्कार नहीं मिला है, उन्हें निराश नहीं होना चाहिए। वे भी पुरस्कार विजेता हैं। मोदी ने देश में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया है। देश में 34 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 19 ने विश्व स्तर पर ख्याति अर्जित की है। उन्होंने बताया कि छह विश्वविद्यालयों को अभी तक विश्व रैंकिंग में स्थान नहीं मिला है। राज्यपाल ने माँ शाकंभरी विश्वविद्यालय में 74% छात्रों के उत्तीर्ण होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रगति संतोषजनक है। उन्होंने कहा, “अपनी लगन से वे देश के भविष्य और गौरव को आगे बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने सभी को बधाई दी।
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