फर्रुखाबाद : जिले में चलाए गए राशन कार्ड सत्यापन अभियान में बड़ी संख्या में अपात्र कार्डधारक चिन्हित किए गए हैं। ये ऐसे कार्डधारक हैं जो संपन्न हैं और उनके पास पक्का मकान के साथ चार पहिया वाहन भी है। इसके बावजूद वे मुफ्त राशन ले रहे थे। ऐसे 600 लोगों के नाम राशन कार्ड सूची से हटा दिए गए हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र यादव ने बताया कि जिले में करीब 3 लाख 59 हजार राशन कार्डधारक हैं। जिनमें से 38 हजार अंत्योदय कार्डधारक हैं। वहीं, अंत्योदय श्रेणी के 38 हजार 233 राशन कार्डों में से करीब 600 अंत्योदय कार्ड विभिन्न कारणों से अपात्र पाए गए। जिनके पास ट्रैक्टर, जमीन है या वे संपन्न हैं। इसके आधार पर अपात्र पाए जाने पर उनके राशन कार्ड हटा दिए गए हैं। इसके अलावा पात्र गृहस्थी के राशन कार्डों का भी सत्यापन किया गया है, जिसमें अपात्र पाए गए करीब 200 कार्डधारकों के राशन कार्ड हटा दिए गए हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र यादव ने बताया कि जिले में 86% आधार केवाईसी हो चुकी है। थोड़ी समस्या यह है कि कुछ लोग बाहर रह रहे हैं। कुछ लोगों का आधार अपडेट नहीं हुआ है। इस वजह से केवाईसी अपडेट नहीं हो पा रही है। अब सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जिन लोगों का केवाईसी 31 अगस्त तक पूरा नहीं हुआ, उनका राशन रोक दिया गया है। ऐसे में उनका अनाज 3 महीने के लिए रोक दिया गया है।
यानी उनका राशन रुका रहेगा। अगर वे केवाईसी करा लेते हैं, तो उनका राशन जारी हो जाएगा। जो भी आधार कार्ड धारक हैं, वे अपना केवाईसी जरूर करा लें। सरकार की ओर से जो दिशा-निर्देश आए हैं, वे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए हैं। अभी जिले में करीब 15% लोग ऐसे हैं, जिनका केवाईसी अभी तक नहीं हुआ है।
इस मामले में कायमगंज तहसील सबसे ऊपर रही, जहाँ अंत्योदय योजना के 294 कार्ड पात्र पाए गए, जबकि सदर में 214 और अमृतपुर में 96 कार्ड निरस्त किए गए हैं। पात्र गृहस्थी कार्डों में सबसे ज़्यादा अनियमितताएँ कायमगंज और सदर में मिलीं, जहाँ 96-96 लोग अपात्र पाए गए। सत्यापन के दौरान कई ऐसे उदाहरण सामने आए जहाँ परिवार संपन्न दिखाई दे रहा था। संपन्न होने के बावजूद लोग मुफ़्त राशन ले रहे थे।
सत्यापन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि ज़िले में बड़ी संख्या में ऐसे सक्षम लोग अब तक जन कल्याणी योजना का अनुचित लाभ उठा रहे थे। प्रशासन के अनुसार, सभी अपात्र कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं। उनकी जगह नए पात्र लाभार्थियों का चयन किया जा रहा है। ताकि वास्तविक ज़रूरतमंदों को उनका हक़ मिल सके।

