सहारनपुर : 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सीएम योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएम योगी के शंकराचार्य से शंकराचार्य होने के प्रमाण मांगने के बाद माघ मेला छोड़ दिया है वहीं सीएम योगी से योगी होने के प्रमाण मांग लिये हैं। इतना ही नहीं इसके लिए 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है। शंकराचार्य और सीएम योगी के बीच हुए विवाद को लेकर सहारनपुर पहुंची साध्वी प्राची ने न सिर्फ शंकराचार्य को शांत होने की अपील की ब्लकि विवाद को शंकराचार्य की हठधर्मिता करार दिया है। साध्वी प्राची ने कहा कि शंकराचार्य जी द्वेष की भावना से हठधर्मिता कर रहे हैं। उन्हें हठधर्मिता छोड़ कर अपनी व्यक्तिगत साधना पर ध्यान देना चाहिए। शंकराचार्य जी धार्मिक नहीं ब्लकि सियासी बातें कर रहे हैं। जो एक संत यानी शंकराचार्य को शोभा नहीं देता। अगर उन्हें बोलना ही है तो बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर क्यों नहीं बोलते? साध्वी प्राची ने गाय को राजकीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। वहीं धार्मिक स्थलों पर गैर हिन्दुओं के प्रवेश की मांग को जायज बताया और धार्मिक स्थलों को थूक जिहाद, मूत्र जिहाद से मुक्त कराने की मांग की है।
साध्वी प्राची ने कहा कि “देखिए जब हम संत बन जाते हैं तो मैं समझती हूं संत का मतलब यही होता है हमे अहंकार छोड़ना पड़ता है। बहुत सारी व्यवस्थायें होती हैं उनको त्याग करके हमें अपने व्यक्तिगत साधना पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। वहीं राजसत्ता क्या कर रही है देशहित में राजसत्ता निर्णय ले रही है हमारे लिए यही सबसे बड़ी बात है। हिन्दू समाज तो वैसे ही लुट रहा है पिट रहा है। 2017 के बाद मान सम्मान और स्वाभिमान की जिंदगी हिन्दू जीने लगा नहीं तो बहुत दुर्दशा थी। शंकराचार्य जी की बात करें तो उनसे हाथ जोड़ कर निवेदन करूंगी उन्हें ज्यादा कुछ नहीं कहूँगी बस वे साधना करें। आदमी यानि संत कहीं भी बैठ कर साधना कर सकता है और साधना का वातावरण बना सकता है। य़ह जरूरी नहीं वे अपनी साधना माघ मेले में ही करे। ये हठधर्मिता छोड़कर अपनी व्यक्तिगत साधना में हमें ध्यान देना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सीएम योगी के बाद शंकराचार्य ने सीएम योगी से संत होने के प्रमाण के सवाल पर साध्वी प्राची ने कहा कि एक तरह से प्रतियोगिता चला दी। संतो को यह सब शोभा नहीं देता। जिनके हाथों ने राजसत्ता संभालनी चाहिए वे राजसत्ता संभाले। वही शंकराचार्य को समझना चाहिए वितंडावाद ना खड़ा करें। इससे समाज मे कितना गलत मैसेज जा रहा है? हिन्दू समाज वैसे ही टूट रहा है वैसे ही बिखर रहा है वैसे ही इतनी आपत्ति विपत्ति रहती है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हुए अत्याचार पर शंकराचार्य जी क्यों नहीं बोले अभी तक?उचित होता अगर शंकराचार्य जी बांग्लादेश की घटना को लेकर आंदोलन करते? जिसके बाद शंकराचार्य जी आज पूरे विश्व शंकराचार्य होते। केवल स्नान करने के मुद्दे को इतना बड़ा तूल दे दिया। ये मेरी समझ से बाहर है।
साध्वी प्राची ने गाय को राजकीय पशु घोषित करने की मांग पर तंज कसते हुए कहा कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार में य़ह मांग उठाई थी तभी तो गौरक्षा के लिए धरना प्रदर्शन किया था। जिसके बदले में आजम खान ने लाठीचार्ज कराया था। बार बार कह रहीं हूं शंकराचार्य जी को य़ह शोभा नहीं देता। अच्छी बात है गाय की सेवा और रक्षा के लिए आगे आए लेकिन एक द्वेष की भावना से आए यह उचित नहीं है। अगर गौरक्षा के आगे आए उसके लिए हम और पूरा देश उनके साथ है। गौमाता राजकीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय पशु घोषित होनी चाहिए। हर देशभक्त और गौ भगत गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहा है।
उत्तराखंड के चारधाम यात्रा समेत कई धार्मिक स्थलों पर मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की जा रही है इस सवाल पर उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा जब होती है वहां अपने ढाबों और होटलों के नाम बदलकर श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाता है। तीन साल पहले हमने य़ह आवाज उठाई थी चारधाम यात्रा पर गैर हिन्दू का प्रतिबंध होना चाहिए। पिछले दिनों भी हमने हर की पैड़ी हरिद्वार में जो कुंभ का क्षेत्र है वहां भी मुसलमानों और गैर हिन्दुओं पर रोक लगाई जाये। जिसका कारण ये लोग खुद हैं ये कभी थूक जिहाद चलाते हैं कभी मूत्र जिहाद चलाते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वा जी सुलझे हुए सीएम हैं। वे राष्ट्र भगत हैं तो उनके सामने ऐसी कोई घटना सामने आई होगी जिसके चलते उन्होंने इस तरह का ब्यान दिया होगा। सपा सरकार की याद दिलाते हुए कहा कि उस वक्त रिक्शा वाला अखिलेश यादव के नाम की धमकी देता था। उन्होंने जो कहा ठीक कहा। 2027 की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि कॉंग्रेस का नाम मत लीजिए। कॉंग्रेस पार्टी ऑक्सीजन पर है वो वेंटिलेटर पर गई हुई है। कॉंग्रेस अब कहाँ दिखाई दे रही है उसे वेंटिलेटर भी रहने दो। दूर से देखते रहो, बस कॉंग्रेस का नाम नाम रह जाएगा। कहीं भी दिखाइ नहीं देगी पत्ता साफ़ है।

