मेरठ ललिता गौतम हत्याकांड: पिता ने दी महाआंदोलन की चेतावनी, पुलिस ने आरोपों पर दी सफाई

Lalita Gautam Murder Case in Meerut

मेरठ : बहुचर्चित ललिता गौतम हत्याकांड एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पीड़िता के पिता ने सोशल मीडिया पर दो मिनट का वीडियो जारी कर पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 20 जुलाई तक मामले के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो परिवार और समाज के लोग बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। वहीं, मेरठ पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अब तक की कार्रवाई कानून के अनुसार हुई है।

20 वर्षीय बीए छात्रा ललिता गौतम की 15 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हुई थी। 17 मई को उसका शव रोहटा क्षेत्र के एक गन्ने के खेत से बरामद किया गया था। घटना के बाद से ही परिवार लगातार सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुख्य आरोपी के अलावा अन्य लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वीडियो संदेश में ललिता के पिता ने बताया कि 19 जून को उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। प्रशासन ने 26 जून तक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए। इसके विरोध में 8 जुलाई को दलित महापंचायत के आह्वान पर कमिश्नरी चौक पर प्रदर्शन किया गया।

परिवार का आरोप है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और महिलाओं व पीड़ित परिवार के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि कई लोगों को जबरन हिरासत में लिया गया, फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए और निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया गया। परिवार ने इन मुकदमों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की है।

दूसरी ओर, मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने बताया कि पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद जांच के दौरान उसके भाई अंकित चौधरी, जो पीएसी में सिपाही है, को भी साजिश रचने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना ने बताया कि पुलिस टीम कई बार पीड़ित परिवार से मिली है और उन्हें विवेचना की प्रगति से अवगत कराया गया। महिला पुलिस अधिकारियों ने परिवार की काउंसलिंग भी की थी और उस समय परिवार ने कार्रवाई पर संतोष जताया था। पुलिस का कहना है कि इस संबंध में वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं।

अब यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी ओर पुलिस अपनी जांच को निष्पक्ष बताते हुए सभी आरोपों का जवाब दे रही है। ऐसे में 20 जुलाई के बाद इस मामले की दिशा और स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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