रामपुर : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी जेल से रिहाई का रास्ता आसान नहीं हुआ है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एफआईआर से जुड़े मामले में रामपुर पुलिस उन्हें कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। विवेचक की ओर से इस संबंध में न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। सोमवार को होने वाली सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। अदालत ने आजम खान को भी पेश होने के लिए तलब किया है।
ईडी की एफआईआर से बढ़ी कानूनी मुश्किल
मामला 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान, जौहर ट्रस्ट समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के कथित गबन, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले की विवेचना सीओ टांडा पंकज पंत कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आजम खान के खिलाफ रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया है। पुलिस की इस पहल के बाद उनकी रिहाई को लेकर स्थिति और पेचीदा हो गई है। अब अदालत तय करेगी कि मामले में पुलिस को कस्टडी रिमांड मिलती है या नहीं।
दो पैन कार्ड मामले में मिली जमानत
आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ दो पैन कार्ड का मामला भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथि वाले दस्तावेजों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए और उनके जरिए अलग-अलग आयकर रिटर्न दाखिल किए। इस मामले में आजम खान पर भी आरोप लगाए गए थे।
18 अक्टूबर 2025 को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों ने सेशन कोर्ट में अपील की। वहीं, सरकार ने सजा बढ़ाने की मांग की। सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल कर दी, जबकि अब्दुल्ला आजम की सजा सात साल बरकरार रखी गई।
इसके बाद दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई। हालांकि, अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहने के कारण जमानत के बावजूद उनकी तत्काल रिहाई पर अनिश्चितता बनी हुई है।
दूसरे मामलों का भी सामना
आजम खान के खिलाफ लखनऊ में हज हाउस की जमीन से जुड़ा मामला भी दर्ज है। इसके अलावा अजीमनगर थाने में दर्ज ईडी की एफआईआर में जौहर ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है। अब्दुल्ला आजम भी जौहर ट्रस्ट में पदाधिकारी रह चुके हैं। ऐसे में दूसरे मुकदमों में संभावित कार्रवाई उनकी रिहाई की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
सोमवार की सुनवाई पर टिकी नजरें
अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि विवेचक की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान की जेल से रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस की रिमांड अर्जी पर अदालत क्या फैसला सुनाती है, इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है।

