सहारनपुर : सहारनपुर के सरसावा इलाके में इन दिनों एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहाँ सेना में अधिकारी पद पर तैनात एक दूल्हे ने दहेज-मुक्त शादी करके दहेज प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़े युवाओं को बड़ा संदेश भी दिया है। मेजर दूल्हे मधुर चौधरी ने दुल्हन के परिवार से न सिर्फ़ एक रुपया बतौर शगुन लिया बल्कि एक नारियल लेकर शादी की सभी रस्में पूरी की। मधुर चौधरी की इस पहल से जहां दुल्हन के परिजनों ख़ुशी का माहौल है वहीं इलाके के लोग इस कदम की सराहना कर रहे हैं।

आपको बता दें कि थाना सरसावा इलाके के गाँव मीरपुर निवासी चौधरी ओमपाल सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड फ़ौजी हैं और वर्तमान में सरसावा आर्य जाट समाज विकास समिति के संयुक्त सचिव हैं। चौधरी ओमपाल सिंह का बेटा मधुर चौधरी सेना मेजर के पद पर तैनात है। हाल ही में ओमपाल सिंह ने अपने बेटे मधुर की शादी बिना किसी दहेज के करके समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। मेजर मधुर चौधरी की शादी ब्रजमंडल इलाके की रहने वाली कैप्टन ज्योति सौरोत से हुई। इस मौके पर मेजर मधुर चौधरी ने केवल एक रुपये का एक शगुन लेकर दहेज़ में दी गई मोटी रकम वापस कर दी और एक नारियल लेकर शादी की सभी रस्मों को पूरा किया। मेजर मधुर के इस कदम से मौके पर मौजूद बाराती और घराती सब हैरान रह गए।
हर कोई उनके इस कदम की सराहना कर रहा है। दुल्हन बन कर आई कैप्टन सौरोत भी बेहद खुश नजर आ रही हैं। कैप्टन सौरोत का कहना है कि दहेज़ रहित शादी से वे बेहद खुश हैं। मेजर मधुर चौधरी के पिता चौधरी ओमपाल सिंह ने कहा कि उनके लिए उनकी बहू ही सबसे बड़ा दहेज है। उन्होंने बताया कि हालाँकि कई जाने-माने परिवारों से शादी के प्रस्ताव आए थे लेकिन उनके परिवार ने पक्का फ़ैसला कर लिया था कि वे बिना कोई दहेज के ही शादी करेंगे। धन-दौलत तो आती-जाती रहती है, लेकिन एक गुणवान बहू दो परिवारों को आपस में जोड़ने का काम करती है। उनकी पत्नी ने भी इसी बात का समर्थन करते हुए कहा कि बेटी ही असल में लक्ष्मी का रूप होती है और वही घर में सच्ची खुशहाली लाती है।
अपनी दहेज-मुक्त शादी के बाद मेजर मधुर चौधरी ने बताया “जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तो मैं अक्सर अखबारों में ऐसी खबरें पढ़ता था कि दहेज की माँग की वजह से शादी के रिश्ते टूट जाते हैं। उसी समय मैंने अपने आप से एक पक्का वादा किया था कि मैं पहले एक ऊँचे ओहदे वाला अफ़सर बनूँगा, और उसके बाद ही शादी करूँगा। अपनी शादी में मैं दहेज के तौर पर एक रुपये से ज़्यादा कुछ भी नहीं लूँगा। उन्होंने आगे कहा, “मेजर बनने के बाद मैंने अपने परिवार वालों को भी अपने इस फ़ैसले के बारे में बताया। नतीजतन मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया और मैं सिर्फ़ एक रुपया और एक नारियल लेकर अपनी शादी कर पाया। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता द्वारा सिखाई गई अच्छी बातों और मूल्यों का सम्मान करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करें। इस अनोखी पहल की सराहना न केवल स्थानीय क्षेत्र में बल्कि दूर-दूर तक हो रही है। लोग इसे दहेज प्रथा के विरुद्ध एक सशक्त संदेश बता रहे हैं।
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