उद्धघाटन के बाद ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेवे में आई दरारें, पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना पर उठे सवाल 

Cracks appear on the Delhi-Dehradun Expressway shortly after its inauguration, Raising questions about PM Modi's ambitious project.

सहारनपुर : देहरादून में 14 अप्रैल से शुरू हुआ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी द्वारा उद्धघाटन के कुछ दिन बाद ही फ्लाईओवर की दीवार में दरार आने से हाईवे ऑथोरिटी में हड़कंप मच गया है। थाना बिहारीगढ़ इलाके के गणेशपुर के पास फ्लाईओवर में आई दरार ने न सिर्फ गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सबंधित विभाग ने आनन-फानन में मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। फ्लाईओवर की दीवार में आई दरार को रोकने के लिए लगभग 20 एंकर प्लेट्स लगाई गई हैं। जिससे स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना में शुरुआती चरण में ही इस प्रकार की तकनीकी खामियां भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं।

आपको बता दें कि प्रधान मंत्री मोदी की महत्वकाकांक्षी परियोजना आधारशिला 2021 में रखी गई थी और कई बार समय सीमा बढ़ने के बाद 2026 में इसे पूरा किया गया। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे को दिल्ली और देहरादून के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी के लिए एक गेमचेंजर माना जा रहा है। इसके बनने से यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद जताई गई थी। इस परियोजना की प्रमुख विशेषता इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा है, जिसे एशिया का सबसे लंबा बताया जा रहा है। यह गलियारा खास तौर पर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बनाया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी। इसमें आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए दो अंडरपास और डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है। इसके अलावा, ‘साउंड बैरियर’ और ‘लाइट बैरियर’ जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं भी की गई हैं ताकि वन्यजीवों पर शोर और रोशनी का न्यूनतम प्रभाव पड़े।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्धघाटन के 6 दिन बाद ही गणेशपुर के पास बने फ्लाई ओवर में दरार आ गई। राहगीरों ने दरार देखि तो वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। हाइवे में दरार का वीडियो वायरल होने के बाद हाईवे ऑथोरिटी हड़कंप मच गया। आनन फानन में NHIA के अधिकारी मौके पर पहुंचे और फ्लाई ओवर की दरारों को रोकने के लिए एंकर प्लेट्स लगाई गई हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई हो। इससे पहले भी बीती बरसात के दौरान एलिवेटेड रोड के 24 पिलर कमजोर पाए गए थे, जिनमें दरारें देखी गई थीं। इन पिलरों को बाद में “जैकेटिंग” तकनीक के जरिए मजबूत किया गया था। खास बात यह है कि ये पिलर नदी के मुहाने के पास स्थित थे, जहां पानी के बहाव और मिट्टी के कटाव के कारण संरचनात्मक दबाव अधिक रहता है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए परियोजना में बड़े स्तर पर पेड़ों को बचाने और नए पौधे लगाने का काम भी किया गया। जहां शुरुआत में 45 हजार पेड़ों की कटाई का अनुमान था, वहीं उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से केवल 11,160 पेड़ों को ही काटना पड़ा और 33,840 पेड़ों को सुरक्षित बचाया गया। इसके साथ ही लगभग 1.95 लाख नए पौधे भी लगाए गए। हालांकि बार-बार सामने आ रही निर्माण संबंधी खामियां इस परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते विस्तृत जांच और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो यह भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित एजेंसियां पारदर्शिता के साथ जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करें और निर्माण गुणवत्ता को सुनिश्चित करें।
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