चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) बॉन्ड पॉलिसी में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था से राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सरकारी सेवा में रहते हुए क्लीनिकल स्पेशलिटी में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टर अब अपने मूल विभाग में ही सेवाएं देते रहेंगे।
इससे राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी और लोगों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और उनकी सेवाओं का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे प्रदेश के जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं और मजबूत होंगी।
वहीं सरकार ने नॉन-क्लीनिकल तथा पैरा-क्लीनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था लागू की है। ऐसे डॉक्टर जो राज्य के मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का लाभ लेकर प्री-क्लीनिकल या पैरा-क्लीनिकल विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करते हैं, उन्हें मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के अधीन चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में तीन वर्ष तक अनिवार्य रूप से सेवाएं देनी होंगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मेडिकल कॉलेजों में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही मेडिकल छात्रों को अनुभवी और प्रशिक्षित फैकल्टी का मार्गदर्शन मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नई नीति स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे एक ओर अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव का सीधा लाभ प्रदेश के मरीजों, मेडिकल छात्रों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मिलेगा तथा हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और अधिक सुदृढ़ होगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव का सीधा लाभ प्रदेश के मरीजों, मेडिकल छात्रों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मिलेगा तथा हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और अधिक सुदृढ़ होगा।
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