संतकबीरनगर : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को संतकबीरनगर पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही सामाजिक संगठनों, धर्म प्रेमियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ उनका अभिनंदन किया। जगह-जगह स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए और उनके दर्शन व आशीर्वाद के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गौ माता का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा, संवर्धन और उन्हें “राष्ट्र माता” का दर्जा दिलाना प्रत्येक सच्चे सनातनी का परम और अनिवार्य कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से उनका जनजागरण अभियान देशभर में चल रहा है और जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि समाज को गौ संरक्षण और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। उनके अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण केवल संतों की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से सनातन धर्म की मूल भावनाओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने की अपील की।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन के दौरान धार्मिक विषयों पर होने वाली विवादित टिप्पणियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की ओर से समय-समय पर आने वाले कुछ बयान समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा करते हैं। उनका कहना था कि धार्मिक आस्थाओं और पूज्य स्थलों के संबंध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी बेहद संवेदनशील होती है और ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि यह केवल साधारण चोरी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा घोटाला है, जिसमें प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत होने की आशंका है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोहराया कि उनका उद्देश्य सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और गौ माता के सम्मान के लिए जनजागरण करना है। उन्होंने कहा कि उनका यह अभियान देशभर में निरंतर जारी रहेगा और समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करने का प्रयास लगातार चलता रहेगा।

