नई दिल्ली : जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। अदालत इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को ही करेगी। याचिकाकर्ता की ओर से तत्काल सुनवाई की मांग किए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को आज ही सुनने का फैसला किया है।
जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट में मेंशनिंग के दौरान मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकारियों ने जंतर-मंतर के आसपास के क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अचानक निलंबित करने का आदेश जारी किया है। याचिका में इस कार्रवाई को मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है।
याचिका में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इंटरनेट आज के समय में लोगों के लिए संचार और सूचना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में किसी क्षेत्र में लंबे समय तक या बार-बार मोबाइल डेटा सेवाओं को बंद करने से आम नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। छात्रों की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए एहतियाती कदम उठाया था।
बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दूरसंचार अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत जंतर-मंतर के आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया गया था। यह प्रतिबंध शाम से लेकर देर रात तक प्रभावी रहा। इसके चलते जंतर-मंतर के अलावा कनॉट प्लेस और मंडी हाउस से जुड़े आसपास के इलाकों में भी मोबाइल डेटा सेवाएं प्रभावित होने की बात सामने आई।
सरकार की ओर से मोबाइल इंटरनेट बंद करने के पीछे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इंटरनेट सेवाओं को इस तरह बंद करना नागरिकों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों को प्रभावित करता है।
याचिका में दावा किया गया है कि इंटरनेट सेवाओं के बार-बार बाधित होने से आम जनता के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और पेशेवरों को भी भारी परेशानी हो रही है। व्यापारिक गतिविधियों से लेकर ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल संचार तक, मोबाइल इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ने के कारण सेवा बंद होने से लोगों के रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
याचिकाकर्ता ने सरकार के आदेश को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना प्राप्त करने के अधिकार से भी जोड़ते हुए इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
अदालत आज दोपहर बाद इस मामले पर सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट यह देख सकता है कि मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने के लिए सरकार की ओर से दिए गए सुरक्षा संबंधी कारण और कानूनी आधार पर्याप्त हैं या नहीं। साथ ही अदालत याचिकाकर्ता की ओर से मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर उठाए गए सवालों पर भी विचार कर सकती है।
जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच यह मामला अब अदालत पहुंच गया है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला न केवल वर्तमान प्रदर्शनकारियों के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि भविष्य में कानून-व्यवस्था के नाम पर इंटरनेट सेवाओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

