”इस्लाम नए ज़माने के हिसाब से नहीं, क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ चलेगा” : उलेमा 

Ulema on Dhirendra Shastri

सहारनपुर : जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक व मशहूर देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए मुस्लिम महिलाओं के बीच पर्दे को लेकर बदलती सोच पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज कुछ मुस्लिम ख़वातीन को यह कहते हुए सुनना कि “पर्दा पुराने ज़माने की बात है, अब वक़्त कुछ और है” बेहद अफ़सोसनाक है।

मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि पर्दा इस्लाम की अहम तालीमों में से है और इसे महज़ ज़माने के बदलाव के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हमारे अंदर दीनी तालीम की कमी हो गई है? क्या इस्लाम भी वक़्त के साथ बदल जाएगा? उन्होंने कहा कि इस्लाम ज़माने की बदलती पसंद के मुताबिक़ नहीं, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में चलेगा।

उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि नई पीढ़ी को दीनी तालीम और इस्लामी उसूलों से जोड़ने के लिए घरों में बेहतर तालीमी माहौल बनाया जाए। मौलाना गोरा ने कहा कि बच्चों और घर के लोगों की तरबियत केवल स्कूल और कॉलेज की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि घर का माहौल भी उनके किरदार और सोच पर गहरा असर डालता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि अपने घरों में क़ुरआन, हदीस और दीनी तालीम के लिए नियमित माहौल तैयार करें।

उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर की सुविधाओं और तकनीक से फ़ायदा उठाना अपनी जगह, लेकिन दीन के बुनियादी अहकाम को सिर्फ़ इस वजह से बदल देना कि “ज़माना बदल गया है”, सही रवैया नहीं है। मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने अंत में कहा कि “हमें अपने घरों में ऐसा तालीमी और दीनी माहौल बनाना होगा, जहाँ हमारी बेटियाँ और बेटे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपने दीन, तहज़ीब और इस्लामी पहचान से भी वाक़िफ़ हों।”

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NPR BHARAT NEWS के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts