देवबंद : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और इस्लामी विद्वान मौलाना मुफ्ती डॉ. यासिर नदीम-अल-वाजदी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई शिकायत और साझा किए गए एक वीडियो के आधार पर यह कार्रवाई की है।
जानकारी के मुताबिक, हरेंद्र चौधरी नाम के व्यक्ति ने सहारनपुर पुलिस को एक्स के माध्यम से शिकायत भेजी थी। शिकायत के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया था। आरोप है कि एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी के दौरान मुफ्ती यासिर नदीम से एक सवाल पूछा गया। सवाल में एक व्यक्ति द्वारा मंदिर में मूर्ति पूजा करने और दूसरे व्यक्ति द्वारा एक बच्ची के साथ गलत हरकत करने की स्थिति में पूछा गया था कि दोनों में से बड़ा अपराध कौन सा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस सवाल के जवाब में मुफ्ती यासिर नदीम ने मूर्ति पूजा को बड़ा अपराध बताया। हरेंद्र चौधरी ने इस कथित बयान को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर मंगलौर पुलिस चौकी इंचार्ज लोकेंद्र सिंह की ओर से मुफ्ती यासिर नदीम-अल-वाजदी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि एक्स प्लेटफॉर्म पर वीडियो साझा किया गया था और इसी वीडियो को आधार बनाकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब वीडियो की सत्यता, उसके संदर्भ और उसमें कही गई बातों की जांच कर रही है।
कौन हैं मुफ्ती यासिर नदीम?
मौलाना मुफ्ती डॉ. यासिर नदीम-अल-वाजदी भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और वर्तमान में अमेरिका के शिकागो में रहते हैं। वह दारुल उलूम ऑनलाइन के संस्थापक एवं निदेशक बताए जाते हैं। इसके अलावा वह शिकागो स्थित इस्लामिक इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में हदीस और फिक्ह की शिक्षा देते हैं। मुफ्ती यासिर नदीम ने इस्लामी विषयों पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं। वह देवबंद के रहने वाले प्रसिद्ध अरबी विद्वान दिवंगत मौलाना नदीम-उल-वाजदी के बेटे हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वीडियो में कही गई बात किस संदर्भ में थी और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

