सहारनपुर : एक ओर जहां सीएम योगी प्रदेश में जीरो टॉलरेंस के दावे कर रहे हैं वहीं सहारनपुर में फर्जी टोल प्लाजा का भंडाफोड़ न सिर्फ सरकार के दावों की पोल खोल रहा है बल्कि प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सहारनपुर के थाना सरसावा इलाके में सहारनपुर-अंबाला हाइवे पर फर्जी टोल प्लाजा चलाकर 50 करोड़ से ज्यादा की वसूली की गई है। इस टोल प्लाज़ा पर फर्जी रसीदों के जरिये ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ज़बरदस्ती टोल टैक्स वसूला गया है। ख़ास बात तो ये है कि फर्जी रसीदों पर टोल वसूली का खेल सफेदपोश नेताओं के संरक्षण में चल रहा था। जिसके चलते पुलिस ने सपा नेता समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

एसपी ग्रामीण सागर जैन ने बताया कि हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपये वसूले जा रहे थे। इसके लिए टोल प्लाज़ा ऑपरेटर ने खुद ही फ़र्ज़ी रसीदें छपवाई थीं। जो किसानों को पैसे के बदले दी जाती थीं। शुरुआती पूछताछ में टोल प्लाजा के मालिक कमलजीत ने बताया कि जबरन वसूली करीब एक साल से चल रही थी। अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी थी। हम पिछले 5 सालों के टोल प्लाजा के डेटा की जांच कर रहे हैं। सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अब तक मिली जानकारी से पता चलता है कि पिछले साल भी टोल ऑपरेशन का काम कमलजीत प्रधान ही संभाल रहे थे। इस पूरे मामले की गहन जांच चल रही है। जांच के दौरान कुछ और लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।

अब इस पूरे मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ SP नेताओं ने आरोप लगाया है कि नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी कमलजीत प्रधान को जेल भिजवा दिया। कमलजीत सिंह सरसावा इलाके के शेखपुरा गांव के रहने वाले हैं। वह नकुड़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे हैं। कमलजीत की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी मौजूद हैं। जैसे ही कमलजीत को जेल हुई, सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। कई SP सदस्य कमलजीत के समर्थन में सामने आए हैं। वे इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं।
नकुड़ से बीजेपी विधायक मुकेश चौधरी का कहना है कि कमलजीत मेरा भतीजा है। वह हमारे दोस्त का दोस्त है। वह मेरे चुनाव के दौरान मेरे साथ था। मैं उसे जेल क्यों भेजूंगा? मेरा नाम इसमें राजनीतिक रूप से घसीटा जा रहा है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। घटना वाले दिन मुझे उसके चचेरे भाई का फोन आया और उसने पूरी घटना बताई। उसके बाद मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की। अधिकारियों ने मुझे पूरी प्रक्रिया समझाई। रुद्रसेन जी (एसपी नेता) हमारे बड़े भाई जैसे हैं। उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। हमें खुद टोल के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। उसके बाद मैंने सरकारी आदेश प्राप्त किया और पढ़ा। इसमें साफ लिखा है कि अगर ट्रैक्टर के पीछे कुछ भी लगा है, तो टोल नहीं लिया जा सकता। यह पुष्टि हो गई है कि टोल लिया जा रहा था। विधायक ने आगे कहा कि कमलजीत को छुड़ाने के लिए मैंने ही नहीं बल्कि हमारे मंत्री बृजेश सिंह और विधायक कीरत सिंह ने भी अधिकारियों को फोन किया था। उसके सबके साथ कनेक्शन हैं। जो मेरे साथ चुनाव में काम करता था, उसे मैं कैसे गिरफ्तार करवा सकता हूँ? वह पिछले दो सालों से टोल प्लाजा मैनेज कर रहा है।

