टोल प्लाजा पर फर्जी रसीदों पर वसूले गए करोड़ों रूपये, प्लाजा मालिक समेत 4 लोग गिरफ्तार, जिला प्रशासन में मचा हड़कंप 

Millions of rupees collected at toll plazas using fake receipts

सहारनपुर : एक ओर जहां सीएम योगी प्रदेश में जीरो टॉलरेंस के दावे कर रहे हैं वहीं सहारनपुर में फर्जी टोल प्लाजा का भंडाफोड़ न सिर्फ सरकार के दावों की पोल खोल रहा है बल्कि प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सहारनपुर के थाना सरसावा इलाके में सहारनपुर-अंबाला हाइवे पर फर्जी टोल प्लाजा चलाकर 50 करोड़ से ज्यादा की वसूली की गई है। इस टोल प्लाज़ा पर फर्जी रसीदों के जरिये ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ज़बरदस्ती टोल टैक्स वसूला गया है। ख़ास बात तो ये है कि फर्जी रसीदों पर टोल वसूली का खेल सफेदपोश नेताओं के संरक्षण में चल रहा था। जिसके चलते पुलिस ने सपा नेता समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

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आपको बता दें कि सहारनपुर के डीएम मनीष बंसल को शिकायत मिली थी कि सरसावा टोल प्लाज़ा पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपये टोल टैक्स के रूप में वसूले जा रहे हैं। जबकि हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूलने का कोई नियम नहीं है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने टीम के 9 जनवरी को टोल प्लाजा पर छापा मारा।छापेमारी कर जांच की तो शिकायत सही पाई गई। जिलाधिकारी ने मौके पर पकड़ी गई रसीदों की जांच कराई तो वह भी फर्जी निकली और जब ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से वसूली के नियम पूछे गए तो टोल मैनेजर भी बगले झाँकने लगे। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने टोल प्लाज़ा के मालिक कमलजीत प्रधान, टोल मैनेजर कालू सिंह राणावत और टोल कर्मचारी अक्षय कुमार और सागर को गिरफ़्तार कर लिया।  उनके पास से फर्जी रसीद बुक, फटी हुई रसीदें और वसूली का हिसाब लिखी 3 पर्चियां बरामद हुईं। क्षेत्रीय राजस्व अधिकारी रामप्रसाद गुप्ता ने सरसावा थाने में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। वहीं 12 जनवरी को सहारनपुर सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों की ज़मानत अर्ज़ियां खारिज कर दीं।

एसपी ग्रामीण सागर जैन ने बताया कि हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपये वसूले जा रहे थे। इसके लिए टोल प्लाज़ा ऑपरेटर ने खुद ही फ़र्ज़ी रसीदें छपवाई थीं।  जो किसानों को पैसे के बदले दी जाती थीं। शुरुआती पूछताछ में टोल प्लाजा के मालिक कमलजीत ने बताया कि जबरन वसूली करीब एक साल से चल रही थी। अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी थी। हम पिछले 5 सालों के टोल प्लाजा के डेटा की जांच कर रहे हैं। सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अब तक मिली जानकारी से पता चलता है कि पिछले साल भी टोल ऑपरेशन का काम कमलजीत प्रधान ही संभाल रहे थे। इस पूरे मामले की गहन जांच चल रही है। जांच के दौरान कुछ और लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।

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दरअसल सहारनपुर के पास हरियाणा में यमुनानगर है, जहाँ 350 से ज़्यादा प्लाईवुड फैक्ट्रियाँ हैं। सहारनपुर और देहरादून इलाके से ज़्यादातर पॉपुलर यमुनानगर की फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाता है। मुकाबला इतना ज़्यादा है कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों ने सहारनपुर के खेतों में अपने कलेक्शन पॉइंट बना लिए हैं, जहाँ से पॉपुलर के पेड़ सीधे खेतों से इकट्ठा करके फैक्ट्रियों में पहुँचाए जाते हैं। सहारनपुर में ज्यादातर किसानों ने अपने खेतों में पॉपुलर के पेड़ लगाए हुए हैं। पॉपुलर की कटाई के बाद लकड़ियों को हरियाणा के यमुनानगर में भेजा जाता है। किसान अपने ट्रेक्टर-ट्रॉलियों में पॉपुलर भर यमुनानगर की मंडी इसी हाइवे से जाते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉलियों गुजरती हैं। किसानों की इन ट्रेक्टर ट्रॉलियों को टोल प्लाजा चलाने वालों ने कमाई का ज़रिया बना लिया है।
एसपी देहात सागर जैन ने बताया  “अनुमान है कि पिछले एक साल में टोल के नाम पर लगभग 50 करोड़ रुपये अवैध रूप से वसूले गए हैं। हम पिछले पांच सालों के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं, जिससे और ज़्यादा साफ़ तस्वीर सामने आएगी।” टोल प्लाज़ा का मालिक कमलजीत प्रधान समाजवादी पार्टी से जुड़ा है और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी कर रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता सीधे तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि मौजूदा बीजेपी विधायक मुकेश चौधरी ने अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता की गिरफ़्तारी करवाई है। पुलिस कार्रवाई के बाद से ट्रैक्टर-ट्रॉली से टोल कलेक्शन बंद हो गया है।

सपा जिलाध्यक्ष अब्दुल वाहिद का कहना है कि कमलजीत ने SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था। इसीलिए उन्हें जेल भेजा गया।
अब इस पूरे मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ SP नेताओं ने आरोप लगाया है कि नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी कमलजीत प्रधान को जेल भिजवा दिया। कमलजीत सिंह सरसावा इलाके के शेखपुरा गांव के रहने वाले हैं। वह नकुड़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे हैं। कमलजीत की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी मौजूद हैं। जैसे ही कमलजीत को जेल हुई, सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। कई SP सदस्य कमलजीत के समर्थन में सामने आए हैं। वे इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं।

नकुड़ से बीजेपी विधायक मुकेश चौधरी का कहना है कि कमलजीत मेरा भतीजा है। वह हमारे दोस्त का दोस्त है। वह मेरे चुनाव के दौरान मेरे साथ था। मैं उसे जेल क्यों भेजूंगा? मेरा नाम इसमें राजनीतिक रूप से घसीटा जा रहा है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। घटना वाले दिन मुझे उसके चचेरे भाई का फोन आया और उसने पूरी घटना बताई। उसके बाद मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की। अधिकारियों ने मुझे पूरी प्रक्रिया समझाई। रुद्रसेन जी (एसपी नेता) हमारे बड़े भाई जैसे हैं। उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। हमें खुद टोल के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। उसके बाद मैंने सरकारी आदेश प्राप्त किया और पढ़ा। इसमें साफ लिखा है कि अगर ट्रैक्टर के पीछे कुछ भी लगा है, तो टोल नहीं लिया जा सकता। यह पुष्टि हो गई है कि टोल लिया जा रहा था। विधायक ने आगे कहा कि कमलजीत को छुड़ाने के लिए मैंने ही नहीं बल्कि हमारे मंत्री बृजेश सिंह और विधायक कीरत सिंह ने भी अधिकारियों को फोन किया था। उसके सबके साथ कनेक्शन हैं। जो मेरे साथ चुनाव में काम करता था, उसे मैं कैसे गिरफ्तार करवा सकता हूँ? वह पिछले दो सालों से टोल प्लाजा मैनेज कर रहा है।

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