IDBI बैंक की बिक्री पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- जनता की संपत्ति बेचने का विरोध करेंगे

Election Commission in connivance with BJP destroying democracy, Rahul Gandhi alleges massive 'vote theft'

नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के निजीकरण को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों के समर्थन में उतरते हुए आरोप लगाया कि सरकार उस सार्वजनिक बैंक को बेचने जा रही है, जिसे कर्मचारियों ने घाटे से निकालकर मुनाफे में पहुंचाया है। राहुल गांधी ने कहा कि सार्वजनिक बैंक केवल संपत्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने कर्मचारियों और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

बैंक कर्मचारियों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी

राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर को आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम एक खुला पत्र लिखकर निजीकरण के फैसले पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले साल मार्च में बैंक कर्मचारियों का एक समूह संसद भवन में उनसे मिलने आया था। कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि जिस बैंक को उन्होंने मेहनत से घाटे से निकालकर मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार क्यों बेच रही है।

राहुल गांधी के मुताबिक, उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि मुनाफे में चल रहे सरकारी बैंक को बेचने की जरूरत क्यों है और इस फैसले से कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

घाटे से निकलकर 9 हजार करोड़ से अधिक का मुनाफा

कांग्रेस नेता ने बैंक की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सात साल पहले आईडीबीआई बैंक घाटे में चल रहा था, लेकिन कर्मचारियों की मेहनत से पिछले साल बैंक ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। उन्होंने इसे कर्मचारियों के समर्पण और परिश्रम का परिणाम बताया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की मेहनत से मजबूत हुई संस्था को अब निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित बिक्री पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देना भी है।

सरकारी हिस्सेदारी घटने पर जताई चिंता

राहुल गांधी ने अपने पत्र में बताया कि आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत है। प्रस्तावित विनिवेश के बाद यह हिस्सेदारी घटकर करीब 34 प्रतिशत रह जाने की बात कही गई है।

उन्होंने वर्ष 2003 में संसद में दिए गए उस आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत बैंक में सरकार की कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। राहुल गांधी ने कहा कि संसद में किया गया वादा देश की जनता के प्रति जवाबदेही से जुड़ा होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

आरक्षण और कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल

राहुल गांधी ने आशंका जताई कि बैंक के निजी स्वामित्व में जाने से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस निजी क्षेत्र के साथ-साथ मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र में भी विश्वास करती है। सार्वजनिक बैंक देश के उद्योगों को वित्तीय सहायता देने, आर्थिक विकास को गति देने और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘कर्मचारियों की लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ’

राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि कांग्रेस उनकी जायज मांगों का समर्थन करती है। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपना पत्र साझा करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आईडीबीआई जैसे संस्थानों की स्थापना देश के उद्योगों को मजबूती देने के लिए की गई थी, जबकि मौजूदा सरकार उन्हें बेचने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का मुद्दा अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका, कर्मचारियों के अधिकारों और सरकारी संपत्तियों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

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