90.59 लाख की ठगी, करोड़ों की जांच और स्कोडा पर कानूनी घमासान! श्रद्धा दुबे को कोर्ट का नोटिस, 30 अक्टूबर को होगा अहम फैसला

90.59 लाख की ठगी, करोड़ों की जांच और स्कोडा पर कानूनी घमासान! श्रद्धा दुबे को कोर्ट का नोटिस, 30 अक्टूबर को होगा अहम फैसला

सहारनपुर : आयुष्मान भारत योजना से जुड़े 90.59 लाख रुपये के साइबर ठगी मामले में जब्त लग्जरी स्कोडा कार को लेकर कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। पीड़ित डॉ. प्रभात कुमार वर्मा की ओर से कार को रिलीज कराने के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र पर सहारनपुर की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय की अदालत ने श्रद्धा दुबे को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। पुलिस की पूर्व जांच में सामने आया था कि कथित साइबर ठगी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल स्कोडा कार खरीदने में किया गया और बाद में इसका पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम पर कराया गया था।

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब्त कार को रिलीज करने की मांग पर अदालत क्या फैसला लेती है और वाहन के स्वामित्व से जुड़े तथ्यों का कानूनी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल कार साइबर क्राइम थाने में खड़ी है और उसे छोड़ने के संबंध में अदालत का कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।

90.59 लाख की ठगी से जुड़ा है मामला

यह प्रकरण साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 83/2024 से संबंधित है। आयुष्मान योजना के भुगतान के नाम पर कथित धोखाधड़ी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच के दौरान स्कोडा कार संख्या DL6CM3920 को जब्त किया गया। पुलिस की पूर्व जांच के अनुसार, यह वाहन कथित ठगी की रकम से खरीदा गया था।

डॉ. प्रभात कुमार वर्मा ने कार को रिलीज कराने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इसी अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत ने श्रद्धा दुबे को नोटिस जारी किया। अदालत की ओर से 16 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया था। अब 30 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में संबंधित पक्षों का रुख सामने आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

अदालत के समक्ष वाहन को रिलीज करने की मांग के समर्थन में पेश किए जाने वाले तथ्य, दस्तावेज और संबंधित पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी। जब तक अदालत कोई अंतिम आदेश नहीं देती, तब तक यह तय नहीं माना जा सकता कि कार किसे सौंपी जाएगी।

फोन आया और भुगतान जल्दी कराने का दिया गया भरोसा

डॉ. प्रभात कुमार वर्मा का सहारनपुर के देहरादून रोड पर अस्पताल है। उनके मुताबिक, उनका अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध है, जिसके अंतर्गत पात्र मरीजों का इलाज किया जाता है। योजना के तहत इलाज के भुगतान को लेकर अस्पतालों को संबंधित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

डॉ. वर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले उनके पास लखनऊ से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को आयुष्मान योजना से जुड़ा अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके अस्पताल का भुगतान हो चुका है। साथ ही कहा गया कि यदि वे चाहें तो पूरा भुगतान जल्द जारी कराया जा सकता है।

डॉक्टर के अनुसार, भुगतान जल्दी कराने के बदले फोन करने वाले ने कथित तौर पर बड़े अधिकारियों के नाम पर मोटी रकम की मांग की। लंबे समय से अटके भुगतान को जल्द निकलवाने की उम्मीद में उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 90 लाख रुपये से अधिक की रकम भेज दी। हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।

हकीकत सामने आने के बाद डॉ. वर्मा ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और मामले की शिकायत की। पुलिस ने जांच शुरू की तो कथित साइबर ठगी के तार सामने आए। जांच के दौरान ठगी की रकम से स्कोडा कार खरीदे जाने की जानकारी मिली, जिसे बाद में जब्त कर लिया गया।

अंकित जायसवाल समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस की पूर्व जांच के मुताबिक, लखनऊ निवासी अंकित जायसवाल ने कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल स्कोडा कार खरीदने में किया था। इसके बाद वाहन का पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम पर कराया गया। इसी तथ्य के सामने आने के बाद कार का नाम मामले की जांच में आया और वाहन को जब्त किया गया।

इस मामले में पुलिस ने दिसंबर 2024 में अंकित जायसवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 317(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत कार्रवाई की गई है।

हालांकि, वाहन का पंजीकरण किसी व्यक्ति के नाम पर होने मात्र से उसकी अपराध में संलिप्तता स्वतः साबित नहीं होती। किसी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच में सामने आए साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

डॉ. प्रभात वर्मा को कार वापस मिलने की उम्मीद

पीड़ित डॉ. प्रभात कुमार वर्मा को उम्मीद है कि उन्हें उनकी रकम से खरीदी गई कार वापस मिल सकेगी और मामले में आरोपियों को सजा मिलेगी। कार रिलीज कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करना उनके लिए मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है।

लेकिन वाहन को वापस देने का फैसला केवल पीड़ित की मांग के आधार पर नहीं होगा। अदालत को यह देखना होगा कि वाहन पर दावा किस आधार पर किया गया है, उसके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं और संबंधित पक्षों की दलीलें क्या हैं। इसके साथ ही जब्त संपत्ति के संबंध में लागू कानूनी प्रावधानों पर भी विचार किया जाएगा।

शिवा शर्मा हत्याकांड में भी चर्चा में है श्रद्धा दुबे का नाम

साइबर ठगी मामले में जब्त स्कोडा कार के पंजीकरण को लेकर चर्चा में आई श्रद्धा दुबे का नाम लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस उसकी तलाश कर रही है और उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया गया है।

हालांकि, दोनों मामले अलग-अलग हैं और उनकी जांच तथा कानूनी प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से देखा जाना चाहिए। शिवा शर्मा हत्याकांड से जुड़े आरोपों का साइबर ठगी मामले में कार रिलीज कराने की अर्जी पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ेगा, यह अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगा। किसी मामले में आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।

30 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब 30 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के नोटिस के बाद संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद कार को रिलीज कराने की अर्जी पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

एक तरफ डॉ. प्रभात वर्मा अपनी कथित ठगी की रकम से खरीदी गई कार वापस पाने की उम्मीद लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ वाहन के स्वामित्व और उसे छोड़े जाने से जुड़े कानूनी पहलुओं पर निर्णय होना बाकी है। फिलहाल स्कोडा कार साइबर क्राइम थाने में जब्त है। उसे रिलीज करने या किसी पक्ष को सौंपने का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

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