इंस्टाग्राम से पाकिस्तानी गैंगस्टर तक पहुंचा नेटवर्क, सहारनपुर से पकड़े गए चार स्लीपर सेल ने उड़ाए होश

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सहारनपुर : सहारनपुर में पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े चार कथित स्लीपर सेल की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। जिन युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वे अब तक सामान्य मजदूर और ड्राइवर की जिंदगी जीते दिखाई देते थे। कोई वेल्डिंग का काम करता था तो कोई ट्रक चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था, लेकिन जांच में सामने आया कि यही युवक पिछले करीब छह माह से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टरों के संपर्क में थे और धीरे-धीरे उनका नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड तक फैलने लगा था। पकड़े गए आरोपियों में सरसावा थाना क्षेत्र के ढिक्का कलां गांव निवासी महकाब और शाहरूख शामिल हैं। वहीं परिजनों ने युवकों पर लगे आरोपों को निराधार बताया है।

ग्रामीणों के मुताबिक महकाब और शाहरुख दोनों की पारिवारिक आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। दोनों युवक मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाते थे और अक्सर काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों में जाते रहते थे। महकाब हरियाणा और पंजाब में वेल्डिंग का काम करता था। लगातार बाहर रहने के कारण उसे कई शहरों और रास्तों की अच्छी जानकारी हो गई थी। वहीं शाहरूख भी उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में वेल्डिंग का काम करता था। महकाब के चाचा फुरकान ने बताया कि उसके भतीजा महकाब को गलत गिरफ्तार किया है। ATS ने हरियाणा में गिरफ्तारी किया था जिससे दो दिन पूछताछ के बाद देवबंद लाकर उनके सुपुर्द कर दिया था। साथ में यह भी कहा कि इसका कोई कसूर नहीं है।

बावजूद इसके अगर जांच में इसकी जरूरत पडी तो फोन करने पर लेकर आना पड़ेगा। ATS का फोन आया तो महकाब के पिता उसको वहां खुद छोड़कर आए हैं। ताकि जांच में सहयोग किया जा सके। जबकि महकाब मिलानसार और नेक लड़का है। वह गांव में भी किसी से लड़ाई-झगड़े से भी दूर रहता था। ग्रामीण जाकिर बताते हैं कि दोनों बच्चे निर्दोष हैं। इन पर बहुत गंभीर आरोप लगाये गये हैं। जबकि ऐसा नहीं है। पूरे गांवों में शाहरुख और महकाब पर लगे आरोपों की किसी को जानकारी नहीं है। शाहरुख हमारा अपना बच्चा है जो मजदूरी करके अपने परिवार का सहयोग करता था। करीब दो महीने से देहरादून में टाइल-पत्थर लगाने का काम कर रहा था।

शाहरुख के पिता इकराम का कहना है कि हमें इसके बारे में कभी कुछ पता नहीं चला। डेढ़ महीने से देहरादून में काम कर रहा था। हफ्ते 10 दिन में गांव आता और मिलकर चला जाता था। उसको झूठा फंसाया गया है। मुझे कल ही पता चला कि वह किसी पाकिस्तानी के WhatsApp ग्रुप में जुड़ा हुआ था। जिसके चलते पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया है। इसी मामले में हरिद्वार के ढनढेरा गांव निवासी मुशर्रफ को भी गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वह मसूरी के पास वेल्डिंग का काम करता था। चौथा आरोपी मुजफ्फरनगर के शाहपुर रामराज क्षेत्र का रहने वाला गगनदीप उर्फ गुरी है, जो पेशे से ट्रक ड्राइवर है। ट्रक चलाने के कारण उसका कई राज्यों में लगातार आना-जाना रहता था। पुलिस को शक है कि इसी नेटवर्क और आवाजाही का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक इन चारों की पहचान पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट से इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए हुई थी। शुरुआती बातचीत धीरे-धीरे गहरे संपर्क में बदल गई। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया के जरिए इन युवकों को प्रभावित किया गया और फिर उनसे अलग-अलग राज्यों में गतिविधियां संचालित कराई जाने लगीं। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनका नेटवर्क कितना बड़ा था और किन-किन लोगों से इनके संपर्क थे। सबसे ज्यादा हैरानी गांव के लोगों को इस बात की है कि जिन युवकों को वे रोजमर्रा की जिंदगी में देखते थे, उनके खिलाफ इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं।
ढिक्का कलां गांव के ग्रामीणों का कहना है कि महकाब और शाहरूख का व्यवहार सामान्य था। दोनों गांव में किसी से ज्यादा मेलजोल भी नहीं रखते थे, लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि वे किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। गिरफ्तारी के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। महकाब और शाहरूख के परिवार के लोग मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं और इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। गांव के लोग भी पूरे घटनाक्रम को लेकर सकते में हैं। दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को किस तरह अपने जाल में फंसाया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कई स्तरों पर जांच की जा रही है। चारों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि उनके संपर्कों, फंडिंग और गतिविधियों से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल चार लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। ऐसे में आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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