लखनऊ : राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) हरकत में आ गया है। जिस इमारत में आग लगने से 15 बच्चों की दर्दनाक मौत हुई थी, उस भवन पर एलडीए ने नोटिस चस्पा कर दिया है। भवन स्वामी से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यदि तय समय सीमा में संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है, तो नियमानुसार भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

एलडीए ने नोटिस में पूछा है कि जब भवन का नक्शा आवासीय (रेजिडेंशियल) उपयोग के लिए स्वीकृत था, तो उसमें व्यावसायिक गतिविधियां (कमर्शियल एक्टिविटी) किस आधार पर संचालित की जा रही थीं। साथ ही भवन से जुड़े सभी दस्तावेज और निर्माण की वैधता से संबंधित अभिलेख भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
22 जून को अलीगंज स्थित इस इमारत की तीसरी मंजिल पर बने गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 बच्चों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में चल रहा है। हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2016 में एलडीए ने इसी भवन को लेकर नोटिस जारी करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। हालांकि भवन मालिक ने शपथ पत्र देकर यह आश्वासन दिया था कि भवन में किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी और निर्माण स्वीकृत आवासीय नक्शे के अनुसार ही किया जाएगा। इसी शपथ पत्र के आधार पर तत्कालीन अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 2016 से लेकर 2026 तक एलडीए ने कभी यह जांच क्यों नहीं की कि भवन मालिक अपने शपथ पत्र का पालन कर रहा है या नहीं। यदि समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई की गई होती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
दूसरी ओर पुलिस ने भी सख्त कार्रवाई करते हुए भवन मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं शासन ने भी एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें जोन-6 के पांच सहायक अभियंता (Assistant Engineer) और कई जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।
फिलहाल एलडीए भवन के दस्तावेजों की जांच कर रहा है। यदि भवन स्वामी निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस घटना ने अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

