झांसी में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, तीन गांवों से 23 आरोपी गिरफ्तार

Two dozen cyber fraudsters arrested

झांसी : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां कटेरा थाना क्षेत्र के तीन गांवों—काडोर, मौरयाना और खैरयाना से की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, इन इलाकों से साइबर धोखाधड़ी के लगातार मामले सामने आ रहे थे और एक साल में 217 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं।

कटेरा क्षेत्र को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के तौर पर चिह्नित किए जाने के बाद पुलिस ने यहां सक्रिय नेटवर्क की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क किसी संगठित कारोबार की तरह संचालित किया जा रहा था। इसमें हर आरोपी की भूमिका पहले से तय थी।

फर्जी सिम से लेकर रकम निकालने तक अलग-अलग जिम्मेदारी

पुलिस के अनुसार, नेटवर्क में कुछ लोग फर्जी पहचान पर बैंक खाते और मोबाइल सिम उपलब्ध कराते थे। कुछ सदस्य पीड़ितों को फोन करके ठगी करते थे, जबकि अन्य लोग ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और निकालने का काम संभालते थे। जांच में फर्जी पहचान के अलावा डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग तरीकों से लोगों को डराकर या भ्रमित कर पैसे ट्रांसफर करवाते थे। एसपी साइबर क्राइम अरीबा नोमान के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और संचार साथी पोर्टल से मिले डिजिटल इनपुट के आधार पर कटेरा क्षेत्र में कई संदिग्ध मोबाइल नंबर लगातार सक्रिय पाए गए। जांच में करीब 150 मोबाइल नंबर और दर्जनों बैंक खाते ऐसे मिले, जिनका संबंध इन गांवों से जुड़ा था।

ड्रोन से खेतों और गलियों में सर्च ऑपरेशन

पुलिस ने तीनों गांवों में एक साथ कार्रवाई की। संकरी गलियों और खेतों में तलाशी के लिए ड्रोन की भी मदद ली गई। अधिकारियों के मुताबिक, तकनीकी निगरानी के साथ स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई थी। जांच में पता चला कि नेटवर्क में डेटा जुटाने, मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने, फोन कॉल करने, पीड़ितों को डराने-धमकाने, खातों में रकम मंगाने और पैसे निकालने तक के लिए अलग-अलग लोग काम कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, छह लोग इस पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहे थे। इनमें लक्ष्मण, सत्यम यादव उर्फ शिवम, राजू, नीतिश यादव, धीरेंद्र यादव और यूरो बृजेंद्र यादव शामिल हैं। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारी बनकर करते थे ठगी

पुलिस के अनुसार, लक्ष्मण और सत्यम उर्फ शिवम नेटवर्क के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे। डेटा मिलने के बाद पीड़ितों को फोन किया जाता था। सत्यम कथित तौर पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराता था और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का नाम लेकर गिरफ्तारी की धमकी देता था। कई मामलों में वीडियो कॉल का भी इस्तेमाल किया गया। गिरोह एक बार में बड़ी रकम मांगने के बजाय आमतौर पर 10 से 50 हजार रुपये तक की रकम मांगता था। कम रकम होने के कारण आरोपी एक ही दिन में कई लोगों को अपना निशाना बना लेते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के मुताबिक, पुलिस पहले भी आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर चुकी थी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही वे फरार हो जाते थे। इस बार तकनीकी इनपुट, लगातार निगरानी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मदद से तीनों गांवों में एक साथ कार्रवाई की गई। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और साइबर ठगी से जुड़े मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

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