पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (National Institute of Ayurveda – NIA) आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से लोगों का भरोसा जीत रहा है। संस्थान में इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो आयुर्वेद के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही संस्थान की ओपीडी (OPD) में आने वाले मरीजों की संख्या करीब 50 हजार तक पहुंच चुकी है।
संस्थान में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सकों की देखरेख में मरीजों को परामर्श, पंचकर्म चिकित्सा, औषधीय उपचार, योग और जीवनशैली सुधार से जुड़ी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में बढ़ती मरीजों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि लोग अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपचार को भी प्रभावी और सुरक्षित विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। विशेष रूप से जोड़ों का दर्द, मधुमेह, मोटापा, त्वचा रोग, पाचन संबंधी समस्याएं, माइग्रेन, अस्थमा, एलर्जी और तनाव जैसी पुरानी बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में उपचार के लिए संस्थान पहुंच रहे हैं
संस्थान में पंचकर्म चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, प्राकृतिक उपचार और व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श का लाभ भी मरीजों को मिल रहा है। अनुभवी चिकित्सकों द्वारा प्रत्येक मरीज की प्रकृति (Prakriti) के अनुसार उपचार योजना तैयार की जाती है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान (Research) और प्रशिक्षण का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां नई आयुर्वेदिक तकनीकों, औषधियों और उपचार पद्धतियों पर लगातार शोध कार्य किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को बेहतर और वैज्ञानिक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
सरकार का आयुष पर विशेष फोकसकेंद्र और हरियाणा सरकार द्वारा आयुष प्रणाली को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान पंचकूला जैसे संस्थानों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
संस्थान प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में मरीजों को और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो वर्ष 2026 के अंत तक ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है।

