यूपी में सड़क क्रांति को नई रफ्तार: CM योगी और नितिन गडकरी ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा, 1.94 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर फोकस

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सड़क और राजमार्ग नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क अवसंरचना से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति, नई योजनाओं, भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृतियों और भविष्य की सड़क रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक और मजबूत सड़क नेटवर्क किसी भी विकसित राज्य की आधारशिला होता है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क केवल आवागमन को आसान नहीं बनाता, बल्कि निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए और जहां भी प्रशासनिक बाधाएं हों, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन: गडकरी

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। तेजी से बढ़ते औद्योगिक निवेश, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन को देखते हुए राज्य में विश्वस्तरीय सड़क संपर्क विकसित करना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, बिजली एवं पानी जैसी उपयोगिताओं के स्थानांतरण और अन्य विभागीय औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।

10 हजार किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास

बैठक में एनएचएआई के चेयरमैन ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। इस अवधि में लगभग 10,204 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का आवंटन किया गया है। इनमें से 9,329 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच 606 किलोमीटर नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जबकि 1,010 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण पूरा किया गया। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर अब तक लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इनमें केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 23,445 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

सरकारी फैसलों से परियोजनाओं को मिली गति

बैठक में बताया गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए रॉयल्टी मुक्त मिट्टी की उपलब्धता, रिंग रोड एवं बाईपास परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण लागत में राज्य सरकार की भागीदारी तथा सरकारी भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराने जैसे फैसलों से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय तेजी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के कारण बड़ी परियोजनाएं अब पहले की तुलना में अधिक तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

इन प्रमुख परियोजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक में प्रदेश की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें लगभग 13,980 करोड़ रुपये की लागत वाली मथुरा-बरेली-सितारगंज फोरलेन परियोजना, 5,904 करोड़ रुपये की आगरा-अलीगढ़ फोरलेन परियोजना, आगरा-ग्वालियर-झांसी-नागपुर आर्थिक गलियारा, कानपुर रिंग रोड, नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (जेवर) को जोड़ने वाला छह लेन संपर्क मार्ग तथा मुरादाबाद-काशीपुर चार एवं छह लेन परियोजना शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और देश के प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत होगा। इससे माल परिवहन की लागत कम होगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर विशेष ध्यान

समीक्षा बैठक में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क परियोजनाओं पर भी विशेष फोकस रहा। अधिकारियों ने बताया कि सोनौली-गोरखपुर फोरलेन, गाजीपुर-बलिया-बिहार सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रयागराज सदर्न रिंग रोड और प्रयागराज-जौनपुर-आजमगढ़-दोहरीघाट राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत-नेपाल सीमा, बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र के बीच संपर्क मजबूत होगा। साथ ही बौद्ध पर्यटन सर्किट को भी नई गति मिलेगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को लाभ मिलेगा।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा लाभ

बैठक में अयोध्या रिंग रोड और धार्मिक महत्व की कई परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अयोध्या रिंग रोड बनने के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। इसके अलावा रामवन गमन मार्ग, राम जानकी मार्ग और 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर तेजी से निर्माण कार्य जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी और नेपाल के जनकपुर जैसे धार्मिक स्थलों तक आधुनिक सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देंगी।

742 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर चर्चा

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामली से गोरखपुर तक लगभग 742 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह कॉरिडोर पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक दूरी को कम करेगा और औद्योगिक विकास, निवेश, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तथा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा और रीवा-रांची चार लेन राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई।

नई परियोजनाओं पर भी तेजी

बैठक में देवा-फतेहपुर फोरलेन परियोजना, वृंदावन बाईपास, कसया-पनियहवा राष्ट्रीय राजमार्ग, हड़िया चौराहा-करमैनी घाट मार्ग, कोदरकूट-बेला चौक मार्ग, कर्नलगंज एवं पश्चिमी गोंडा बाईपास तथा कानपुर में रामादेवी से गोल चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 267 किलोमीटर लंबाई की 10 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं फिलहाल निविदा प्रक्रिया में हैं, जबकि तीन अन्य परियोजनाओं पर जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

बरेली बाईपास परियोजना की समीक्षा के दौरान वृक्षों की कटाई का मुद्दा भी उठा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां संभव हो, पेड़ों को काटने के बजाय आधुनिक तकनीक से उनका प्रत्यारोपण किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

रोपवे और भविष्य की योजनाएं

बैठक में केंद्रीय सड़क निधि (CRIF) के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं और राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स प्रबंधन लिमिटेड (NHLML) द्वारा प्रस्तावित वृंदावन और प्रयागराज रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को आधुनिक परिवहन सुविधाओं से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, उपयोगिताओं के स्थानांतरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क अवसंरचना का यह विस्तार उत्तर प्रदेश को देश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और राज्य के प्रत्येक क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेगा।

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