नई दिल्ली : जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के विधायक एच.डी. रेवन्ना की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें रेवन्ना के खिलाफ एक महिला की कथित मर्यादा भंग करने (IPC धारा 354) का आरोप हटाया गया था। मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। अदालत ने रेवन्ना को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार की याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या था हाई कोर्ट का फैसला?
कर्नाटक हाई कोर्ट ने नवंबर 2025 में एच.डी. रेवन्ना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत लगाए गए आरोप को खारिज कर दिया था। हालांकि, अदालत ने यौन उत्पीड़न (IPC धारा 354A) से जुड़े आरोपों को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी निर्देश दिया था कि शिकायत दर्ज करने में हुई देरी को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 468 के तहत माफ किया जा सकता है या नहीं, इस पर विचार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि उसने हाई कोर्ट द्वारा धारा 354 के आरोप हटाने के आदेश को पहले चुनौती क्यों नहीं दी। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार को अधिक अनुशासित और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। पीठ ने निचली अदालतों की कार्यवाही पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक बार अदालत आरोपों का संज्ञान ले चुकी थी, तो बाद में उन्हें किस आधार पर बदला गया। अदालत ने इस प्रक्रिया पर नाराज़गी भी जताई।
घरेलू सहायिका की शिकायत से जुड़ा मामला
यह मामला रेवन्ना के पूर्व घरेलू कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में एच.डी. रेवन्ना पर यौन उत्पीड़न और महिला की मर्यादा भंग करने के आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिकायत में एच.डी. रेवन्ना और उनके बेटे प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं, इसलिए प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र रूप से जांच आवश्यक है।
पहले भी विवादों में रहा परिवार
एच.डी. रेवन्ना देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के बेटे और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बड़े भाई हैं। उनके बेटे और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना पहले से ही यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से जुड़े कई मामलों का सामना कर रहे हैं। उन मामलों में से एक में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है। प्रज्वल रेवन्ना का मामला उस समय राष्ट्रीय चर्चा में आया था, जब लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उनके कथित आपत्तिजनक वीडियो सार्वजनिक हुए थे।
उसी दौरान शिकायतकर्ताओं में से एक महिला ने एच.डी. रेवन्ना पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद यह तय होगा कि हाई कोर्ट के आदेश में कोई बदलाव होगा या नहीं। मामले पर अगली सुनवाई में अदालत राज्य सरकार और एच.डी. रेवन्ना का पक्ष सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी।

