लखनऊ : उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब एक महीने पहले प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को अपनी अगली पारी का ऐलान कर दिया। उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा करते हुए कहा कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी, बल्कि सीधे लोगों के साथ मिलकर काम करेंगी। उनका कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल किसी एक नेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति करने के तरीके में बदलाव लाना है।
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि वह ऐसे लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी समस्याएं या तो सरकारी दफ्तरों तक पहुंच नहीं पातीं या पहुंचने के बाद भी उन पर सुनवाई नहीं होती। उन्होंने देश की आजादी के बाद के 80 वर्षों को लेकर भी सवाल उठाने की बात कही और कहा कि वह लोगों के साथ मिलकर यह समझना चाहती हैं कि इतने लंबे समय में देश और समाज के सामने मौजूद बुनियादी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो सका।
‘किसी पार्टी के साथ नहीं, जनता के साथ राजनीति’
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे शुरू नहीं होगी। उनके मुताबिक राजनीति कैसे शुरू होगी और आगे किस दिशा में जाएगी, यह लोगों के साथ मिलकर तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश ऐसे लोगों को साथ लाने की है, जो व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं और अपने आसपास की समस्याओं को लेकर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पास राजनीति के पारंपरिक साधन यानी पैसा, बाहुबल या जातीय और धार्मिक समीकरण नहीं हैं। इसके बजाय वह लोगों की भागीदारी को आधार बनाकर अपनी राजनीतिक राह तैयार करना चाहती हैं। उन्होंने शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों, मजदूरों, वकीलों, छात्रों और महिलाओं समेत अलग-अलग वर्गों के लोगों से इस पहल से जुड़ने की अपील की है।
दिव्या मित्तल ने अपना व्हाट्सऐप नंबर भी सार्वजनिक किया है और लोगों से सुझाव देने तथा अपनी समस्याएं साझा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति की शुरुआत और उसका स्वरूप जनता के साथ बातचीत के आधार पर तय किया जाएगा।
प्रशासनिक अनुभव को राजनीति से जोड़ने की तैयारी
दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। करीब 13 वर्ष की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी और संत कबीरनगर, मिर्जापुर तथा देवरिया में जिलाधिकारी के पद पर रह चुकी हैं। उनकी आखिरी तैनाती उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के तौर पर थी।
30 अगस्त 2026 को उन्होंने आईएएस सेवा से इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक की थी। बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और 15 सितंबर से यह प्रभावी हो गया। इस्तीफे के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। 27 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि 29 सितंबर को वह अपने भविष्य की योजना के बारे में बताएंगी।
‘यूपी मेरी कर्मभूमि, यहीं से शुरू होगी यात्रा’
राजनीति में प्रवेश की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से ही होगी। प्रशासनिक सेवा में लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में काम करने के कारण यहां के ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय समस्याओं से उनका सीधा अनुभव रहा है।
अपने वीडियो संदेश में उन्होंने सरकारी व्यवस्था से जुड़े कुछ अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने ऐसे स्कूलों, सड़कों, जमीन से जुड़े मामलों और दूसरी सार्वजनिक समस्याओं का उदाहरण दिया, जिनके समाधान के लिए सरकारी स्तर पर फैसले होने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा। उनके मुताबिक यही अनुभव उन्हें राजनीति में आने और नीतिगत स्तर पर काम करने की ओर ले गए।
सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों का भी किया जिक्र
दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया पर उनके बारे में लगाए गए एक दावे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के कुछ घंटों बाद एक राज्य स्तरीय राजनीतिक प्रवक्ता की ओर से यह दावा किया गया कि उन्होंने रात में एक बड़े राजनीतिक नेता से मुलाकात की थी। दिव्या मित्तल के मुताबिक ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं थी। उन्होंने इसे सवाल उठाने वाली महिला को डराने की कोशिश के तौर पर पेश किया। यह उनके संबोधन में किया गया दावा है; संबंधित आरोप के स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि वह डरने वाली नहीं हैं और सवाल पूछती रहेंगी। उनका कहना है कि राजनीति में आने के बाद भी वह लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने और व्यवस्था से जवाब मांगने की कोशिश करेंगी।
आगे की राह लोगों के साथ तय करने का दावा
दिव्या मित्तल की घोषणा ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने फिलहाल अपनी राजनीतिक पहल को जनता के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की बात कही है।
उनका अगला फोकस संगठन को किस रूप में खड़ा करना होगा, किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी और चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल उन्होंने लोगों से सीधे संवाद शुरू करने की पहल की है। इसके लिए उन्होंने अपना व्हाट्सऐप नंबर जारी करते हुए आम लोगों से जुड़ने और सुझाव देने की अपील की है।
इस तरह 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल ने अब राजनीति का रास्ता चुनने की घोषणा कर दी है। उन्होंने किसी दल में शामिल होने के बजाय जनता के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करने की बात कही है। आने वाले समय में यह पहल किस स्वरूप में आगे बढ़ती है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका क्या रहती है, यह उनके अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

