सहारनपुर में 15 हजार की रिश्वत लेते कानूनगो गिरफ्तार, 7 महीने से पैमाइश के लिए भटक रहा था किसान

सहारनपुर में 15 हजार की रिश्वत लेते कानूनगो गिरफ्तार

सहारनपुर : जमीन की पैमाइश कराने के लिए सात महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसान की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई की है। टीम ने तहसील सदर परिसर में कानूनगो प्रदीप रोहेला को 15 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि किसान की जमीन की धारा-24 के तहत पैमाइश कराने के एवज में 40 हजार रुपये की मांग की गई थी।

कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। किसान ने यह भी आरोप लगाया कि वह पहले अलग-अलग किस्तों में करीब 80 से 82 हजार रुपये दे चुका है। एंटी करप्शन टीम ने आरोपी कानूनगो को थाना सदर बाजार पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सात महीने से लंबित थी जमीन की पैमाइश

पीड़ित किसान मोहम्मद तारिक के मुताबिक, जमीन उनके पिता के नाम पर है। जमीन के वास्तविक रकबे और मौके पर उपलब्ध भूमि को लेकर समस्या सामने आने के बाद उन्होंने करीब सात महीने पहले धारा-24 के तहत पैमाइश कराने के लिए आवेदन किया था। किसान का आरोप है कि आवेदन के बावजूद उनकी फाइल लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ी और पिछले करीब पांच महीने से कानूनगो के पास लंबित थी।

तारिक के अनुसार, वह अपनी समस्या का समाधान कराने के लिए लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों के चक्कर काट रहे थे। आरोप है कि जब भी वह कानूनगो से पैमाइश के संबंध में मिलने जाते थे, उनसे रुपये मांगे जाते थे। किसान का दावा है कि अलग-अलग मौकों पर कभी दो हजार, कभी तीन हजार, कभी पांच हजार तो कभी सात हजार रुपये देने पड़े। इस तरह उनके मुताबिक अब तक करीब 80 से 82 हजार रुपये दिए जा चुके थे। किसान ने बताया कि उन्होंने दिए गए रुपयों का हिसाब भी लिखकर रखा है।

पैमाइश के लिए मांगे गए थे 40 हजार रुपये

किसान मोहम्मद तारिक के अनुसार, जमीन की पैमाइश की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कुल 40 हजार रुपये की मांग की गई थी। उनका दावा है कि 16 या 17 तारीख को वह पांच हजार रुपये पहले ही दे चुके थे। इसके बाद 15 हजार रुपये देने की बात हुई। किसान ने बताया कि लगातार परेशान होने के बाद उन्हें एंटी करप्शन टीम के संपर्क नंबर की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने टीम से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई।

बुधवार को तहसील सदर परिसर में एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए कानूनगो प्रदीप रोहेला को 15 हजार रुपये लेते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में हलचल मच गई। टीम आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए थाना सदर बाजार ले गई। हालांकि, रिश्वत की मांग, पहले किए गए कथित भुगतान और पूरे मामले से जुड़े अन्य आरोपों की पुष्टि जांच के आधार पर की जानी बाकी है।

जमीन के रकबे को लेकर परेशान था किसान

मोहम्मद तारिक ने जमीन के रकबे को लेकर अपनी परेशानी भी बताई। उनके मुताबिक, एक जमीन सात बीघा दो बिस्वा और दूसरी तीन बीघा 18 बिस्वा की है। किसान का दावा है कि मौके पर जमीन का रकबा अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल रहा था। इसी समस्या का समाधान कराने के लिए उन्होंने पैमाइश का आवेदन किया था। किसान ने यह भी आरोप लगाया कि आगे की प्रक्रिया में एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च होने की बात कही गई थी।

हालांकि, इस दावे से संबंधित विस्तृत जानकारी और स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। तारिक ने बताया कि एंटी करप्शन टीम से संपर्क करने के बाद उन्होंने अपनी शिकायत और समस्या से जुड़े तथ्यों की जानकारी दी। कार्रवाई के बाद उन्होंने टीम का आभार जताया। उन्होंने कुछ अन्य लोगों का भी जिक्र किया, जिनसे इस संबंध में बातचीत होने की बात कही, लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हुई है।

एसपी सिटी ने दी कार्रवाई की जानकारी

एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि एंटी करप्शन टीम ने थाना सदर बाजार क्षेत्र में एक अभियुक्त को रंगे हाथ पकड़ा है। थाने में आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मामले की जांच के दौरान शिकायतकर्ता के आरोपों, कथित लेन-देन और जमीन की पैमाइश की लंबित प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। आरोपी कानूनगो के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

रिश्वतखोरी के आरोपों से तहसील में मची हलचल

सहारनपुर तहसील सदर परिसर में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी कामकाज में कथित रिश्वतखोरी का मुद्दा फिर चर्चा में ला दिया है। किसान का आरोप है कि जमीन की पैमाइश जैसे जरूरी काम के लिए उसे महीनों तक इंतजार करना पड़ा और बार-बार रुपये देने पड़े। आखिरकार उसने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की, जिसके बाद कार्रवाई हुई।

फिलहाल मामले में आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच के बाद ही रिश्वत की मांग, कथित पुराने भुगतानों और पैमाइश से जुड़े पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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