सहारनपुर : सहारनपुर : सावन शुरू होते ही कावड़ यात्रा का आगाज हो जाता है। सावन महीने में देश भर के शिव भगत न सिर्फ अमर नाथ , केदार नाथ , बदरीनाथ समेत नीलकंठ महादेव के दर्शन करने जाते हैं बल्कि हरिद्वार से कावड़ में गंगाजल भरकर अपने शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक कर धर्मलाभ उठाते है। महाशिवरात्रि पर्व से एक दिन पहले तक मुख्य मार्गो पर पदयात्रा कर रहे कावड़ियों का कब्जा रहता है। शिव भजनो की धुन पर लाखो करोडो शिवभगत भगवा वस्त्रो में काँधे पर कावड़ लेकर अपने अपने गंतव्य को जाते हैं। लेकिन महाशिरात्रि की पूर्व संध्या से कावड़ मार्ग पर सुपर फास्ट और डाक कावड़ियों का कब्जा हो जाता है। बाइक और गाड़ियों के साथ डाक कावड़ अपने निर्धारित समय पर पहुंचने के लिए भागम भाग रहती है।

कावड़िये नियमो और कानून को ताक पर रख कर जहा एक बाइक पर चार चार लोग सवार होते है वही बाइको के साइनेन्सर निकल कर तेज आवाज करते हुए बढ़ रहे हैं। कावड़ मार्ग पर सिर्फ भजनो और भाग भोले भाग की आवाज सुनाई पड़ती है। डाक कावड़ की ख़ास बात ये है कि कावड़िये मेराथन दौड़ की तरह दिल्ली – राजस्थान , हरियाणा , पंजाब तक 12 – 60 घंटे के निर्धारित समय में अपने शिवालय पहुंचते हैं।
आपको बता दे कि जैसे जैसे महाशिवरात्रि पर्व नजदीक आ रहा है वैसे वैसे शिवभक्तों की भीड़ शिवालयों की ओर बढ़ती जा रही हैं। हर की पैड़ी हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर चले कावड़ियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वहीं कावड़ियों के परिजन और स्थानीय लोग फूल मालाओं से कावड़ियों का स्वागत कर रहे हैं। रविवार सुबह से डाक कावड़ियों ने भी जल उठाकर दौड़ लगानी शुरू कर दी है। हर किसी को अब जलाभिषेक करने की होड़ लगी है। शिवभक्त अपने अपने तरीके से भगवान आशुतोष को जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार से जल भरकर लाते हैं। जहा लोग हरिद्वार से सेकड़ो किलोमीट पदयात्रा कर नाथो के नाथ भोले नाथ को मनाते हैं वहीँ युवाओ में डाक कावड़ का क्रेज बढ़ता जा रहा है। युवा वर्ग पढ़ाई लिखाई और रोजगार के चलते कम से कम समय में कावड़ लाकर भोले नाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके लिए 30 – 40 युवा मैराथन दौड़ लगाकर जल को बिना रुके अपने अपने गंतव्य को जाते हैं। सुपर फास्ट और डाक को एक निर्धारित समय में निर्धारित शिव मंदिर पहुंचना होता है।
डाक कांवड़ की यात्रा का एक प्रमुख नियम यह माना जाता है कि कांवड़ में भरा गंगाजल जमीन पर नहीं रखा जाता। हरिद्वार पहुंचने के बाद कांवड़िए गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। कांवड़ियों का समूह लगातार आगे बढ़ता रहता है। एक कांवड़िया कुछ दूरी तक दौड़ता है और फिर गंगाजल दूसरे कांवड़िए को सौंप दिया जाता है। इस तरह पूरी यात्रा के दौरान गंगाजल को जमीन पर रखे बिना आगे बढ़ाया जाता है। यही व्यवस्था डाक कांवड़ को सामान्य कांवड़ यात्रा से अलग बनाती है। डाक कांवड़ में युवाओं की भागीदारी काफी दिखाई देती है। कई युवा पढ़ाई, नौकरी और रोजगार की व्यस्तता के चलते कम समय में हरिद्वार से गंगाजल लाकर अपने क्षेत्र के शिवालय में जलाभिषेक करना चाहते हैं।कई समूहों में 20 से 40 तक युवा शामिल होते हैं। कुछ कांवड़िए दौड़ते हैं तो उनके साथ बाइक या अन्य वाहन चलते रहते हैं। कुछ दूरी के बाद कांवड़ दूसरे सदस्य को सौंप दी जाती है और यात्रा आगे बढ़ती रहती है।
डाक कांवड़ को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और कठिन संकल्प का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सावन में गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते लाखों श्रद्धालु हर साल हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घरों और शिवालयों तक पहुंचते हैं। हालांकि डाक कांवड़ में समय सीमा का महत्व होने के कारण कई बार कांवड़ियों को लंबी दूरी कम समय में पूरी करनी होती है। ऐसे में तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों के बैठने जैसी स्थिति चिंता का कारण बन सकती है। आस्था की इस यात्रा में उत्साह और उमंग के साथ सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है, ताकि हर शिवभक्त सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सके।
डाक कांवड़ का चलन पिछले करीब दो दशकों में तेजी से बढ़ा है। हालांकि शास्त्रों में डाक कांवड़ का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी के अनुसार, डाक कांवड़ को लेकर शास्त्रों में विशेष जानकारी नहीं मिलती, लेकिन इसमें पवित्र गंगाजल को जमीन पर नहीं रखने की परंपरा को महत्वपूर्ण माना जाता है। आज डाक कांवड़ सावन यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। अंतिम दिनों में हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तक जाने वाले मार्गों पर बड़ी संख्या में डाक कांवड़ दिखाई देती हैं। पैदल कांवड़ यात्रा के बाद अब सड़कों पर डाक कांवड़ का जोश दिखाई दे रहा है। कोई दौड़ते हुए गंगाजल लेकर आगे बढ़ रहा है तो कोई बाइक और वाहनों के काफिले के साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना है। मंजिल एक ही है—अपने शिवालय पहुंचना और भोलेनाथ का जलाभिषेक करना।

