पटना : बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की शिक्षक राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चारों सीटों पर मौजूदा विधान पार्षदों को हार का सामना करना पड़ा है। सबसे चौंकाने वाला परिणाम पटना से आया, जहां भाजपा के नवल किशोर यादव करीब 30 साल पुराना अपना दबदबा बरकरार नहीं रख सके। वहीं, दरभंगा, सारण और तिरहुत में भी नए उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। इन नतीजों ने भाजपा, जदयू, कांग्रेस और जन सुराज समेत कई दलों के सामने अपनी चुनावी रणनीति की समीक्षा करने की चुनौती खड़ी कर दी है।
पटना में नवल किशोर यादव का दबदबा खत्म
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा उम्मीदवार नवल किशोर यादव को 1,057 वोटों से हराया। डॉ. संजीव कुमार को 4,487 वोट मिले, जबकि नवल किशोर यादव को 3,430 वोट प्राप्त हुए।
नवल किशोर यादव पिछले करीब तीन दशकों से इस सीट पर अपना प्रभाव बनाए हुए थे। उनकी हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस जीत के साथ राजद ने शिक्षक वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश की है।
बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पटना से एनडीए के दो उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें नीरज कुमार को सफलता मिली, जबकि नवल किशोर यादव चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने कहा कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी।
दरभंगा में कांग्रेस को झटका, जन सुराज की जीत
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और निवर्तमान एमएलसी डॉ. मदन मोहन झा अपनी सीट नहीं बचा सके। जन सुराज के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया।
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने माना कि पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। उन्होंने उम्मीदवारों के चयन को भी हार की वजहों में शामिल बताया। इस परिणाम से कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है, जबकि जन सुराज को अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिला है।
सारण में निर्दलीय राहुल राज ने मारी बाजी
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के मौजूदा विधान पार्षद आफाक अहमद को हार का सामना करना पड़ा। यहां निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने जीत दर्ज की। राहुल राज भाजपा से जुड़े रहे हैं और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे।
इस सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे। वहीं, जदयू के आनंद पुष्कर भी जीत हासिल नहीं कर सके। राहुल राज की सफलता ने चुनावी मुकाबले में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं।
तिरहुत में भाजपा की वापसी
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पिछले दो चुनावों से जीत दर्ज कर रहे सीपीआई के संजय कुमार सिंह इस बार अपनी सीट नहीं बचा पाए। भाजपा के नरेंद्र कुमार सिंह ने करीब 12 साल बाद इस सीट पर दोबारा जीत हासिल की।
यह परिणाम भाजपा के लिए राहत भरा माना जा रहा है। पार्टी ने इस जीत के जरिए शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का संकेत दिया है।
एनडीए और महागठबंधन के लिए क्या हैं मायने?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों में एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू ने दो-दो सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एनडीए को केवल एक सीट पर जीत मिली। जदयू अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
दूसरी ओर, राजद ने पटना सीट जीतकर सफलता हासिल की, जबकि कांग्रेस अपनी एकमात्र सीट गंवा बैठी। जन सुराज ने दरभंगा में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। सारण में निर्दलीय राहुल राज की जीत ने भी सभी का ध्यान खींचा।
शिक्षक राजनीति में बदलेगा समीकरण?
चारों मौजूदा विधान पार्षदों की हार ने बिहार की शिक्षक राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इन परिणामों से स्पष्ट है कि लंबे समय से किसी सीट पर कायम राजनीतिक प्रभाव भी जीत की गारंटी नहीं होता।
अब सभी दलों की नजर हार के कारणों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर रहेगी। खास तौर पर भाजपा और जदयू के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का अवसर है, जबकि राजद और जन सुराज इसे अपनी राजनीतिक संभावनाओं के विस्तार के रूप में देख सकते हैं।

